विभिन्न समस्याओं से घिरा पलिया नगर अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू
- नगर में चल रहे नगर पालिका उपचुनाव में मतदाताओं को दिए जा रहे विभिन्न ¬प्रकार के प्रलोभन

विभिन्न समस्याओं से घिरा पलिया नगर अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू
– नगर में चल रहे नगर पालिका उपचुनाव में मतदाताओं को दिए जा रहे विभिन्न ¬प्रकार के प्रलोभन

(निर्जेश मिश्र)
लखीमपुर-खीरी। पलिया नगर विभिन्न समस्याओं से घिरा हुआ है। हर बार नगर की जनता बड़ी उम्मीद के साथ अपने चेयरमैन का चुनाव करती है। इसके बाद भी नगरवासी समस्याओं से नहीं उबर पा रहे हैं। कहीं सड़कों की समस्या, कहीं नाली की समस्या तो कहीं आवासों की समस्याएं आम बनी हुई हैं। इसके अलावा नगर में न तो कोई मेडिकल कॉलेज है, न स्टेडियम और न ही पर्याप्त सरकारी स्कूल ही हैं। नगर में मात्र एक प्राथमिक एवं एक उच्च प्राथमिक विद्यालय है। 25 बार्डों वाले पलिया नगर को कम से कम चार सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है और इन सभी आवश्यकताओं की पूर्ति चेयरमैन के प्रयासों से हो सकती है। परन्तु आज तक किसी भी चेयरमैन ने कोई प्रयास नहीं किया। बता दें कि नगरीय चुनावों में छोटे-छोटे मुद्दे प्रत्याशियों के सामने समस्याएं खड़ी कर देते हैं। अभी हाल ही में नगर के पाण्डेय बाबा रोड का निर्माण कराया गया था, जिसमें प्रयोग की गई निर्माण सामग्री में ऐसा घोटाला किया गया था कि रोड 15 दिन भी नहीं चल सकी और उखड़ने लगी। सोचने की बात यह है कि जब धार्मिक स्थलों को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ना पढ़ रहा है तो आम आदमी कैसे सुरक्षित रह सकता है। पाण्डेय बाबा मार्ग की आवाज कई बार उठाई भी गईं और प्रिण्ट, इलैक्ट्रॉनिक एवं शोषल मीडिया तक की सुर्खियां बनी रही पाण्डेय बाबा रोड, लेकिन उसका न तो दोबारा निर्माण कराया गया और न ही सम्बन्धित ठेकेदार के विरूद्ध कोई कार्रवाई हुई। यही सब मुद्दे इस समय नगर में चल रहे पालिकाध्यक्ष पद के उपचुनाव में निकलकर सामने आ रहे हैं। वर्षों से नगर की जनता यह देखती चली आ रही है कि किस तरह से पलिया नगर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है, क्योंकि पलिया नगर पालिका की कुर्सी हमेशा मठाधाशों के ही कब्जे में रही है। इस बार नगर की जनता एक नए चेहरे का चुनाव करना चाहती है, ताकि नगर का समुचित विकास हो और नगरवासियों को भूलभूत सुविधाएं मुहैया हो सकें। हालांकि जनता के इस इरादे को बदलने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए मतदाताओं को तरह-तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं। और तो और अपने पक्ष में वोट करने के लिए मतदाताओं को आर्थिक लालच भी दिया जा रहा है, लेकिन जनता द्वारा उठाई जा रही आवाज से ऐसा लगता नहीं है कि उनका किसी भी प्रकार का लालच जनता को लुभा पाएगा। फिलहाल अब बहुत जल्द ही यह सब सामने आने वाला है। 17 दिसम्बर को चुनाव होने के बाद 19 दिसम्बर को होने वाली मतगणना में सब स्पष्ट हो जाएगा।





