चुनावी समीकरण : राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों पर भारी पड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी आलोक मिश्रा
- नगर सर्वे के दौरान सामने आई मतदाताओं की बात, अबकी बार आलोक मिश्रा के साथ

चुनावी समीकरण : राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों पर भारी पड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी आलोक मिश्रा
– नगर सर्वे के दौरान सामने आई मतदाताओं की बात, अबकी बार आलोक मिश्रा के साथ

(निर्जेश मिश्र ‘‘सम्पादक’’)
पलियाकलां-खीरी। नगर सर्वे के दौरान जनता की अन्तर्वेदना निकलकर सामने आ गई। नगरीय जनता की एकजुटता को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि इस बार राजनैतिक दलों के संरक्षण में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों पर निर्दलीय प्रत्याशी आलोक मिश्रा भारी पड़ने वाले हैं। क्योंकि मतदाताओं का सिर्फ और सिर्फ यही कहना है कि अबकी बार वह आलोक मिश्रा का साथ देंगे। यदि जनता का फैसला यही है तो यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में भाजपा, सपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को करारा झटका लग सकता है।
बता दें कि नगर में पालिकाध्यक्ष पद के लिए होने वाले उपचुनावों का प्रचार-प्रसार दमखम के साथ जोरशोर से चल रहा है। भाजपा, सपा, कांग्रेस एवं निर्दलीय प्रत्याशी जी-जान लगाकर वोटरों को रिझाने में लगे हुए हैं। रविवार को नगर का भ्रमण कर मतदाताओं के मन की बात जानने का प्रयास किया गया। चुनावी सर्वे के दौरान देखने को मिला कि जनता का एकतरफा रूझान निर्दलीय प्रत्याशी आलोक मिश्रा की तरफ है। मतदाताओं से जब भाजपा प्रत्याशी के बारे में बात की गई तो मतदाताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि केबी गुप्ता को वह लोग दो बार नगर पालिका का चेयरमैन चुन चुके हैं, लेकिन दोनों बार नगर का कोई कल्याण नहीं हुआ। जनता का मानना है कि केबी गुप्ता के परिवार को चेयरमैन का पद भलीभूत नहीं होता है, इसका परिणाम सामने है। क्योंकि जब पहली बार केबी गुप्ता चेयरमैन बने थे तो तमाम अड़चने ंलग गईं और उनका बस्ता जमा हो गया था। पूरे पांच साल यूं ही निकल गए थे और पलिया में कोई भी विकास कार्य नहीं हो सका था। लिहाजा नगर पालिका की कुर्सी पूरे ढाई साल तक धूल फांकती रही। उसके बाद जब दूसरी बार नगर की जनता ने उन्हें चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचाया तो उसके बाद जो हुआ वह तो सर्वविदित ही है। हालांकि इतनी दुःखद घटना से उनका परिवार टूट गया, जिससे केबी गुप्ता के परिवार के साथ उन लोगों की पूरी सहानुभूति भी है। परन्तु उनकी पत्नी को इस दुखद घड़ी में चुनाव बिल्कुल नहीं लड़ना चाहिए था। कारण- कि यदि ईश्वर को यही सब मंजूर होता तो उनके फले पूरे परिवार में ऐसी असहनीय और अप्रिय घटना क्यों घटती ? तो यह है जनता का विचार भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी देवी गुप्ता के प्रति। सपा प्रत्याशी महमूद हुसैन खां के बारे में चर्चा करने पर जनता ने बताया कि महमूद हुसैन एक बार नहीं बल्कि कई बार पलिया नगर पालिका के चेयरमैन रह चुके हैं, लेकिन नगर का कभी कोई विकास कार्य नहीं हुआ। और तो और नगर की जनता का भी उन्होंने कभी कोई काम नहीं किया। रही वर्तमान की बात तो अब तो उनकी उम्र भी काफी हो गई है। उम्र के हिसाब से तो अब उन्हें राजनीति से सन्याय ले लेना चाहिए। जनता का कहना यही है कि जब उन्होंने पूर्व में कभी नगर का कोई भला नहीं किया तो अब क्या करेंगे ? अन्य प्रत्याशियों के बारे में बात करने पर तो मतदाताओं का सिर्फ इतना ही कहना था कि निर्दलीय प्रत्याशी आलोक मिश्रा से जब भाजपा और सपा के प्रत्याशी इतना पीछे हैं तो वाकी प्रत्याशी किसी गिनती में ही नहीं हैं। अन्त में जब आलोक मिश्रा को लेकर जनता से चर्चा की गई तो सबका यही मत सामने निकलकर आया कि आलोक मिश्रा तीन बार चेयरमैन पद का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन हर बार उनके हाथ निराशा ही लगी। इसलिए इस बार वह सब मिलकर आलोक मिश्रा को वोट देकर जिताने का प्रयास करेंगे। आलोक मिश्रा नगर पालिका चेयरमैन के लिए एकदम नया चेहरा हैं और उनके अन्दर काम करने का जज्बा भी है। इसके अलावा वह समाजसेवी भी हैं और हमेशा जनता के साथ उसके सुख-दुख में खड़े रहते हैं। जनता का मानना है कि जब अभी जनता के प्रति उनका इतना बड़ा समर्पण है तो जाहिर सी बात है कि चेयरमैन बनने के बाद वह नगर की जनता और नगर के लिए अब तक के अन्य पालिकाध्यक्षों से बेहतर एवं उत्कृष्ट कार्य करेंगे। अब देखना यह है कि जो वादा आज की तारीख में नगर की जनता कर रही है, वह आने वाली 17 तारीख को निभाएगी भी या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।





