विधायक बाबागंज ने मुख्यमंत्री को शिक्षक हितों के समर्थन मे लिखा पत्र
अव्यहारिक आदेश पर पुनः विचार के लिए किया अनुरोध

विधायक बाबागंज ने मुख्यमंत्री को शिक्षक हितों समर्थन मे लिखा पत्र
अव्यहारिक आदेश पर पुनः विचार के लिए किया अनुरोध
लखनऊ, प्राथमिक शिक्षक संगठनों द्वारा डिजिटल हाजिरी के विरुद्ध किये जा रहे विरोध को देखते हुए बाबागंज विधायक और जनसत्ता दल के प्रदेश अध्यक्ष विनोद सरोज ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अव्यहारिक आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। सीएम को लिखे पत्र मे विधायक बाबागंज ने कहा है की शिक्षक संगठनों द्वारा उठायी गयी जायज मांगो को पुरी किये बिना और बिना उनसे संवाद व विचार विमर्श किये इस तरह महानिदेशक प्राथमिक शिक्षा द्वारा 5 जुलाई को ऑनलाइन अटेंडेन्स का आदेश अव्यहारिक है। इस पर शिक्षकों से संवाद करके उन्हे विश्वास मे लेकर ही करना चाहिए।
इसके पक्ष मे तर्क देते हुए जनसत्ता दल के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा की शिक्षक समय से स्कूल आते है लेकिन उनकी भी कई जायज मांगो पर सरकार को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा की इस आदेश से आपाधापी की स्थिती मे सड़क दुर्घटना और मानसिक तनाव से उलझें शिक्षक से गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की अपेक्षा करना उचित नही कहा जा सकता। यही नही इस आदेश से शिक्षकों मे आक्रोश पनप रहा है जो पठन पाठन के माहौल को प्रभावित करेगा इसमे संदेह नही है। इसलिए शिक्षक समाज से उनकी व्यवहारिक मांगो पर गंभीरता और खुलेमन से वार्ता करके उन्हे विश्वास मे लेते हुए कोई आदेश पारित करना चाहिए।
क्या कहता है शिक्षक समाज और संगठन
बेसिक शिक्षा विभाग ने जब से ऑनलाइन उपस्थिती दर्ज करने का आदेश दिया है तब से प्राथमिक शिक्षकों मे आक्रोश है, सावधान इंडिया ने इसके लिए शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों से इस आदेश के सम्बन्ध मे उनकी राय जानी तो उनकी बातें भी जायज लगी। प्रतापगढ़ जनपद के बाबागंज ब्लाक के शिक्षक संगठन के पदाधिकारी प्रभाकर नाथ पांडे फोन ने फोन पर बताया कि प्रदेश का प्राथमिक शिक्षक राज्य कर्मचारियों कि श्रेणी मे आता है तो क्या उसे अन्य राज्य कर्मचारियों कि तरह ही सभी सुविधाएं मुहैया कराई गयी है। ईएल और सीएल अवकाशों के विषय मे अन्य राज्य कर्मचारियों कि तरह क्या शिक्षकों को ये सुविधाएं मुहैया कराई गयी और यदि नही तो इस तरह के बेतुके निर्णय से शिक्षक समाज आहत होगा इसमे कोई संदेह नही है।
वैसे आये दिन सोसल मीडिया के माध्यम से खबरे मिलती है कि अमुक विद्यालय मे शिक्षक गैर जिम्मेदारी से कार्य कर रहे है तो इसके संदर्भ मे उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाई होनी ही चाहिए लेकिन अधिकारियों कि मिली भगत से कुछ हो नही पाता तो उसके लिए पूरे शिक्षक समाज पर अंगुली उठाना कतई उचित नही है।
क्षोभित शिक्षक समाज के हित मे विधायक बाबागंज के पत्र पर सरकार को भी खुला मन दिखाना चाहिए ताकि शिक्षक और सरकार के बीच के अंतरद्वन्द को ख़तम किया जा सके और सुदूर गाँवो मे पढ़ रहे प्रदेश के नौनिहालो को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मुहैया हो सके।





