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अगर बदल दिया होता प्रत्याशी तो भाजपा की जीत सकती थी कौशाम्बी का चुनाव

भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने बताई हार की वजह

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अगर बदल दिया होता प्रत्याशी तो भाजपा की जीत सकती थी कौशाम्बी का चुनाव

भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने बताई हार की वजह

कुण्डा प्रतापगढ़, कौशाम्बी सीट पर भाजपा प्रत्याशी की पराजय यहाँ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के गले नही उतर पा रही है। दो बार के विजयी सांसद का इस तरह से चुनाव हार जाना वो भी ऐसे समीकरण मे जब उन्हे पहले की तुलना मे ज्यादा वोट मिले हो मंथन का बड़ा कारण माना जा सकता है। कौशाम्बी के दो बार के सांसद विनोद सोनकर 1 लाख से अधिक मतों से हार गये तो उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता भी विश्लेषण कर रहे है की आखिर उनकी हार के प्रमुख कारण क्या क्या हो सकता है।
बताते चलें की भाजपा के दो बार सांसद रहे विनोद सोनकर को 2014 और 2019 के चुनाव मे क्रमशः 84 हजार और 92 हजार के करीब वोट कुण्डा और बाबागंज विधानसभा से मिले थे और वो विजयी रहे था। वही 2924 के चुनाव 1 लाख 27 हजार से अधिक मत मिले लेकिन वों इस बार चुनाव हार गये। इस सन्दर्भ मे भास्कर के प्रतिनिधि ने भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से बात किया तो उन्होंने कई चौकाने वाले कारण बताये। कुण्डा विधानसभा के भाव के रहने वाले और पेशे से अधिवक्ता कमला कांत मिश्रा से जब हमने पूछा तो उन्होने चार प्रमुख कारण गिनाये जिसमे से अमित शाह से टिकट वितरण मे हुयी गड़बड़ी, विनोद सोनकर को दुबारा प्रत्याशी बनाया जाना, पूर्व सांसद द्वारा कार्यकाल मे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करना और स्थानीय विधायक राजा भैया की पार्टी को सांसद के चलते गठबंधन मे न लेना इनके चलते भाजपा को यहाँ हार का मुंह देखना पड़ा। बिहार मंडल के पूर्व मंडल अध्यक्ष भाजपा राजेश साहू से इसी मामले को लेकर बात की गयी तो उनका भी कमोवेश यही कहना था की इन्ही कारणों और सांसद की करनी के चलते पार्टी को पराजय का मुंह देखना पड़ा, राजेश साहू चुनाव के 4 महीने पहले सांसद की लगातार उपेक्षा के चलते भाजपा से इस्तीफा देकर राजा भैया की जनसत्ता दल का दामन थाम लिया था। परिणाम ये रहा की भाजपा पूरे मंडल के अधिकांश बूथों पर सिमट के रह गयी। कुण्डा नगर पंचायत चुनावों मे भाजपा का परचम लहराने वाले कुण्डा के विनोद मिश्रा से हमने बात किया तो उन्होंने बताया की भाजपा सांसद नगर पंचायत चुनाव मे अपनी पार्टी की जगह विरोधी पक्ष के प्रत्याशी को अंदर खाने से आशीर्वाद दे रहे थे, जिसके चलते विनोद मिश्रा उनसे नाराज होकर अपने 51 कार्यकर्ताओं के साथ राजा भैया की जनसत्ता दल ज्वाइन कर लिए थे।
ये ऐसे ज्वलंत विषय थे जिन पर यदि समय रहते विचार किया गया होता और कुण्डा के मजबूत क्षत्रिय नेता राजा भैया को साध किया गया होता तो न सिर्फ कौशाम्बी बल्कि पूर्वांचल की दर्जनों सीट आज भाजपा की झोली मे होती।


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