देखिए यह है अनन्तापुर का मन्दिर, इस मन्दिर के नाम है छह एकड़ जमीन
प्रति वर्ष छह एकड़ जमीन का लाखों रुपया हड़प कर जाते हैं धर्म के ठेकेदार

देखिए यह है अनन्तापुर का मन्दिर, इस मन्दिर के नाम है छह एकड़ जमीन
प्रति वर्ष छह एकड़ जमीन का लाखों रुपया हड़प कर जाते हैं धर्म के ठेकेदार

(निर्जेश मिश्र “सम्पादक”)
सावधान इण्डिया न्यूज, शाहजहाँपुर। यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम दरबार का भव्य मन्दिर है और यह जिला शाहजहाँपुर की तहसील पुवायां क्षेत्र के ग्राम अनन्तापुर में स्थित है। मित्रों इस मन्दिर के नाम छह एकड़ जमीन है। वह भी नम्बर एक की जमीन, लेकिन मन्दिर की स्थिति देखने से ऐसा लगता नहीं है कि यह मन्दिर इतनी जमीन का स्वामी है। आखिर छह एकड़ जमीन का सारा पैसा जाता कहां है, यह अपने आप में एक रहस्य बना हुआ है। यदि छह एकड़ जमीन को ठेके पर उठा दिया जाए तो तीस हजार रुपये वार्षिक के हिसाब से एक लाख अस्सी हजार रुपये सालाना हुआ। अब सोचिए कि यदि प्रति वर्ष मन्दिर के निमित्त इतना रुपया खर्च कर दिया जाए तो मन्दिर कैसा होगा। वर्तमान में इस मन्दिर की न तो ढंग से रंगाई-पुताई हो पा रही है और न ही देखरेख। मन्दिर के बगल में ही दो-तीन कमरों का एक भवन बना हुआ है, जिस पर आज तक प्लास्टर तक नहीं हो सका। इसके अलावा मन्दिर प्रांगण में मात्र एक नल लगा हुआ है, जो ठीक से पानी देने की स्थिति में भी नहीं है और पास में बना शौचालय भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। मन्दिर में पूजा-पाठ और साफ-सफाई के लिए रह रहे बाबा जी को भी नाममात्र को ही खर्चा दिया जाता है। आज हमारे देश की स्थिति यह हो गयी है लोग धार्मिक स्थलों का भी हिस्सा हड़प करने लगे हैं। श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि “झूठई लेना झूठई देना झूठई भोजन झूठ चबेना” अर्थात उनका झूठा ही लेना और झूठा ही देना होता है। झूठा ही भोजन होता है और झूठा ही चबेना होता है। (अर्थात् वे लेने-देने के व्यवहार में झूठ का आश्रय लेकर दूसरों का हक मार लेते हैं। परन्तु यहां तो लोग भगवान का ही हक मारकर खाते जा रहे हैं। इस मन्दिर के नाम छह एकड़ जमीन का यदि चौथाई भाग भी हर छह महीने में मन्दिर के निमित्त लगा दिया जाए तो यह मन्दिर इस क्षेत्र का पहला मन्दिर होगा।





