गौरीफंटा बार्डर पर दलाली का अड्डा बनाकर नेपाली नम्बरों से अपराध को अंजाम दे रहा एक तथाकथित पत्रकार
- अपने को पत्रकार बताने वाले दलाल की कराई जाए जांच तो हो सकते हैं कई खुलासे

गौरीफंटा बार्डर पर दलाली का अड्डा बनाकर नेपाली नम्बरों से अपराध को अंजाम दे रहा एक तथाकथित पत्रकार
– अपने को पत्रकार बताने वाले दलाल की कराई जाए जांच तो हो सकते हैं कई खुलासे

(निर्जेश मिश्र ‘‘सम्पादक’’)
सावधान इण्डिया न्यूज, लखीमपुर-खीरी। पलिया तहसील क्षेत्र के गौरीफंटा में भारत-नेपाल सीमा पर एक तथाकथित पत्रकार तस्करी और दलाली में लिप्त रहता है। अपने को पत्रकार बताने वाला दलाल सम्बन्धित अधिकारियों से अच्छे सम्बन्ध बनाए हुए है। जिस कारण बार्डर पर दलाली और तस्करी को अंजाम दे रहे इस दलालरूपी पत्रकार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बताया यह भी जाता है कि पत्रकारिता की हनक दिखाकर उक्त दलाल विभिन्न प्राकर की तस्करी में भी लिप्त रहता है। पुलिस में अपराधिक इतिहास होने के बाद भी इसके विरूद्ध कोई सुरक्षा ऐजेंसियां आवाज नहीं उठा पा रही हैं।
बता दें कि भारत-नेपाल सीमा पर पिछले कई सालों से एक तस्कर एवं दलाल अपने माथे पर पत्रकार का ठप्पा लगाकर अपना अड्डा बनाए हुए है। जो भी अधिकारी/कर्मचारी स्थानान्तरित होकर गौरीफंटा पहुंचता है तो उसे यह दलाल अपना परिचय पत्रकार के रूप में देता है। जिस कारण सम्बन्धित अधिकारी/कर्मचारी उक्त दलाल का सम्मान करने लगते हैं। अपने को पत्रकार बताकर और सम्मान पाकर अधिकारियों को गुमराह करने वाला यह दलाल एक संगठन को भी गुमराह करके उसमें अपनी पैठ बनाए हुए है। संगठन के पदाधिकारियों को इसकी असलियत के बारे में शायद अभी तक पता नहीं चला। पत्रकारिता के नाम पर यह बार्डर पर केवल दलाली और तस्करी का काम करता है। विभिन्न प्रकार की तस्करी करने के लिए यह कई अलग-अलग नेपाली नम्बरों का प्रयोग करता है। जिनमें एक नेपाली नम्बर 009779822662969 भी शामिल है। इस नम्बर से यह दलाल कई प्रतिष्ठित और सम्मानित व्यक्तिं की छवि धूमिल करके उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर चुका है। अभी हाल ही में एक अपराध के तहत इसे जेल भी भेजा जा चुका है। इसके बाद भी सम्बन्धित विभाग पता नहीं क्यों इस दलाल/तस्कर पर मेहरबान हैं। जो अपराध और समाज की बुराईयों का प्रतिकार करे, उसी को पत्रकार कहते हैं। परन्तु यह दलाल पता नहीं कैसा पत्रकार है जो अपने को पत्रकार तो कहता है, लेकिन अपराधों में लिप्त रहता है। ऐसे लोगों की जांच कराकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में भी कोई अपराधी अपने को पत्रकार बताने की हिम्मत न कर सके।





