उठहु राम भंजहु भव चापा, मेंटहु तात जनक परितापा
- बिलहरी में मन्दिर पर चल रहे धनुष यज्ञ मेला में किया गया सीता स्वयंवर का सजीव मंचन

उठहु राम भंजहु भव चापा, मेंटहु तात जनक परितापा
– बिलहरी में मन्दिर पर चल रहे धनुष यज्ञ मेला में किया गया सीता स्वयंवर का सजीव मंचन

गोलागोकर्णनाथ-खीरी। क्षेत्र के ग्राम बिलहरी में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर श्री रामजानकी व हनुमान मंदिर पर शनिवार को सीता स्वयंवर का सजीव मंचन किया गया।
आयोजित सीता स्वयंवर में देश-देश के राजा बैठे हुए हैं और सभी धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाते हुए माता सीता से विवाह करने की आस लगाए हुए हैं। श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि ‘‘भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरई न टारा’’ अर्थात् एक दिन में दस हजार राजाओं ने धनुष उठाया, परन्तु धनुष उठाना तो दूर उसे कोई हिला तक नहीं सका। ऐसा देखकर महाराजा जनक अत्यन्त चिन्तित हुए और उन्होंने कहा कि ‘‘उठहु विप्र निज-निज गृह जाहू। लिखा न विधि वैदेहि विवाहू’’ अर्थात् आप सभी राजागण अपने-अपने घर को जाएं, क्योंकि हमारी पुत्री सिया का विवाह विधाता ने शायद लिखा ही नहीं। जनक जी के ऐसे वचनों को सुनकर गुरू विश्वामित्र स्वयंवर में मौजूद मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम से कहने लगे कि ‘‘उठहु राम भंजहु भव चापा। मेटहु तात जनक परितापा’’ गुरू विश्वामित्र के वचनों को सुनकर भगवान श्रीराम उन्हें प्रणाम करते हुए उठे और धनुष के पास पहुंचे। सर्व प्रथम उन्होंने विशाल शिवजी के धनुष को प्रणाम किया और उसके बाद उसे बड़ी सहजता के साथ उठा लिया। जब उन्होंने उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने की कोशिश की तभी धनुष घोर टंकार करते हुए टूट गया। धनुष टूटते ही जय जयकार होने लगी और बड़ी धूमधाम के साथ माता सीता का विवाह सम्पन्न हुआ। सीता स्वयंवर का सुन्दर मंचन देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। मन्दिर कमेटी के अध्यक्ष राजेश वर्मा व मंत्री राम सहाय वर्मा ने बताया कि मन्दिर के पुजारी रामदास बाबा की अगुवाई में कल (आज) विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा।








