जहरीला काला धुंआ उगल रहे क्षेत्र में संचालित ईंट भट्ठे
- किसानों को पराली जलाने पर दंडित करने वाले अधिकारी आखिर क्यों नहीं कर रहे ईंट भट्ठों के खिलाफ कोई कार्रवाई

जहरीला काला धुंआ उगल रहे क्षेत्र में संचालित ईंट भट्ठे
– किसानों को पराली जलाने पर दंडित करने वाले अधिकारी आखिर क्यों नहीं कर रहे ईंट भट्ठों के खिलाफ कोई कार्रवाई

गोलागोकर्णनाथ-खीरी। पर्यावरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार ने दर्जनों योजनाएं चलाईं। इसके अलावा भारी संख्या में पेड़-पौधे लगवाये जा रहे हैं। इसके बाद भी तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है। एक ओर जहां प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, फैक्ट्री व कारखानों यहां तक कि किसानों की फसलों के अवशेषों को भी जलाने पर पाबंदी लगाई गई। जिसका शख्ती से अनुपालन भी कराया गया। पराली जलाने वाले सैकड़ों किसानों पर अब तक मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और करोड़ों रुपए जुर्माने के रूप में वसूल किया जा चुका। वहीं दूसरी ओर सेमरई वेटलेंड के आस-पास कई भठ्ठे संचालित हैं, जो जहरीला काला धुँआ उगल रहे हैं। सरकारी नियमों के अनुसार ईंट भट्ठे आबादी, नदी, विद्यालय, अस्पतालों, पार्कों, रेलवे लाइनों व पेट्रोल पंपों से काफी दूरी पर संचालित करने का आदेश है। इसे अधिकारियों की उदासीनता कहें या फिर मिलीभगत ? जिले में कई ईंट भट्टे ऐसे संचालित हैं, जिनको नई तकनीक (हाईड्राफ तकनीक) से संचालित करने का काम किया गया। जो पर्यावरण संरक्षण की ओर आकर्षित करते हैं। किंतु क्षेत्र में ऐसे कई भट्ठे संचालित हैं जो कतई चलने योग्य नहीं हैं। सरकार को खुली चुनौती दे रहीं ऊँची-ऊँची चिमनियां न जाने क्यों सेटेलाइट की गिरफ्त में नहीं आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों से इस मामले में बातचीत की गई तो किसानों ने सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि गन्ने की जरा सी पत्ती फूंकने पर आफिसों में बैठे अधिकारियों को सेटेलाइट से खबर लग जाती है। ऊंची चिमनियों का काला धुंआ आखिर क्यों नहीं दिखाई देता है ? नेशनल हरित प्राधिकरण के अशोक कुमार मुन्ना ने बताया कि ईंट भट्ठे अवैध रूप से संचालित हो रहें हैं। इसका ज्ञापन जल्द ही सम्बन्धित अधिकारियों को दिया जाएगा।
मामला संज्ञान में है और इसको जल्द ही अमल में लाया जायेगा। जो ईंट भट्ठे मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, उन पर कार्यवाही की जाएगी।
श्रद्धा सिंह ‘‘उपजिलाधिकारी सदर’’






