पलिया का व्यापार ठप होने से परेशान व्यापारी कभी भी कर सकते हैं हड़ताल
लगभग दो माह बाद भी नहीं शुरू हो सका पलिया-भीरा मार्ग का आवागमन

पलिया का व्यापार ठप होने से परेशान व्यापारी कभी भी कर सकते हैं हड़ताल
लगभग दो माह बाद भी नहीं शुरू हो सका पलिया-भीरा मार्ग का आवागमन

(निर्जेश मिश्र “सम्पादक”)
सावधान इण्डिया न्यूज, पलिया-भीरा मार्ग का आवागमन बन्द होने से व्यापार पूरी तरह से ठप होने की कगार पर है। जिसको लेकर नगर के व्यापारी काफी परेशान हैं। शासन-प्रशासन व्यापारियों की समस्याओं को गम्भीरता से नहीं ले रहा है। यदि इसी तरह से शासन-प्रशासन मौन रहा तो पलिया नगर सहित आसपास क्षेत्र की जनता भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगी। बता दें कि क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण आठ जुलाई से पलिया-भीरा मार्ग पर पानी चल रहा है। जिसको लेकर प्रशासन ने इस मार्ग का आवागमन बन्द कर दिया था, जो आज भी बन्द है। हालांकि बाइक, कार और कभी-कभी बसों का संचालन शुरु हो जाता है, लेकिन मालवाहक वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बन्द चल रहा है। मालवाहक वाहनों का आवागमन बन्द होने की वजह से न तो कोई माल आ पा रहा है और न ही जा पा रहा है। जिस कारण नगर के व्यापारियों का बुरा हाल है। यदि शासन-प्रशासन चाहे तो इस समस्या का समाधान हो सकता है। बड़ी-बड़ी नदियों में पुल बन जाते हैं और यहां एक छोटी सी मामूली पुलिया का निर्माण नहीं हो पा रहा है। आखिर कब तक ऐसी स्थिति रहेगी और कब तक बन्द रहेगा पलिया का व्यापार। जनहित की समस्या को शासन-प्रशासन गम्भीरता से नहीं ले रहा है। यह सब खननमाफियाओं की बलिहारी है जो आज पलिया क्षेत्र की जनता भुगत रही है। पलिया में जैसे ही बाढ़ आई, मार्ग बन्द हुआ और समस्याएं उत्पन्न हुईं वैसे ही खननमाफिया पलायन कर गये। अब खननमाफिया पलिया में नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसा लगता नहीं है कि यह समस्या समय रहते समाप्त हो पाएगी, क्योंकि जिनकी जिम्मेदारी पलिया का विकास करने की थी, वही पलिया का विनाश करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में समस्या का समाधान कैसे सम्भव हो सकता है। अब आने वाले समय के लिए क्षेत्र की जनता इस पर विचार करे कि पलिया का विकास कराना है कि विनाश। पूरी तरह से सोच-समझ और विचार मंथन करने के बाद ही यदि यहां की जनता निर्णय ले तभी क्षेत्र का कल्याण हो सकता है। वैसे जनता भी आजकल उदासीनता का शिकार हो रही है। सरकार से जुड़ी समस्या से सम्बंधित यदि समाज के कुछ लोगों से बात की जाती है तो वह कहते हैं कि हम सरकार के खिलाफ कुछ भी बोल नहीं सकते, क्योंकि हम पार्टी के आदमी हैं। हमारे समाज की यह विडम्बना देखिए कि अपने भाई और बाप के खिलाफ बोल सकते हैं। यहां तक कि पुलिस से लेकर कोर्ट तक जा सकते हैं। लेकिन सरकार के लिए एक भी शब्द नहीं बोल सकते, जोकि समाज के हित में है।





