पलिया-भीरा मार्ग अवरुद्ध होने से जनता की बढ़ीं परेशानियां
जनप्रतिनिधियों को गालियां देते नजर आए बाढ़पीड़ित

पलिया-भीरा मार्ग अवरुद्ध होने से जनता की बढ़ीं परेशानियां
– जनप्रतिनिधियों को गालियां देते नजर आए बाढ़पीड़ित

(निर्जेश मिश्र “सम्पादक”)
सावधना इण्डिया न्यूज, पलियाकलां-खीरी। लगातार हुई वारिश से पलिया क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण ग्राम अतरिया के पास रेलवे लाइन कट गयी। जिससे आवागमन पूरी तरह से बन्द हो गया है। रेलवे लाइन कटने से पानी के तेज बहाव के कारण भीरा रोड भी कट गयी। बता दें कि यहां पर वर्ष 2021 में रोड कटी थी। सम्बन्धित अधिकारियों और जनप्रतिधियों की लापरवाही देखिए कि लगभग तीन साल बीत जाने के बाद भी यहां पुलिया का निर्माण नहीं कराया जा सका। अभी हाल ही में पुलिया का निर्माण तब शुरू कराया गया जब बरसात का सीजन शुरू हो गया था। पुलिया का अधूरा निर्माण ही हो सका था कि तब तक बाढ़ आ गयी और जनता के लिए जटिल समस्या उत्पन्न हो गयी। वर्तमान की स्थिति यह है कि जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है और लोगों का आना-जाना पूर्ण रूप से वाधित हो गया है। ग्राम अतरिया के पास नावों को लगाया गया है। लोग नाव पर सवार होकर शारदा पुल तक जाते हैं। जहां से उन्हें अन्य सवारियों का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि प्रशासन ने नाविकों को 230 रुपये प्रति दिन के हिसाब देने का ऐलान किया है। इसके बाद भी नाव चालक लोगों से 50-50 और 100-100 रुपये की अवैध वसूली कर रहे हैं। इसके अलावा पलिया उपजिलाधिकारी ने नाव चालकों को निर्देशित किया है कि एक नाव पर चार से पांच लोगों को ही बिठाया जाएगा। इसके बाद भी नाव चालक अपनी-अपनी नावों पर दस से बारह लोगों को बिठाते हैं। साथ ही अन्य सामान भी नाव पर लादा जाता है। इससे नाव पर भार अधिक हो जाता है। ऐसे में दुर्घटना होने की भी संभावना प्रबल है। नाविकों की मनमानी के चलते किसी भी समय कोई अनहोनी हो सकती है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा अवसरवादी ई-रिक्शा चालक भी लोगों से नाजायज किराया वसूल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो इसका समाधान हो सकता है। इसके लिए प्रशासन को पुलिया के दोनों तरफ बसें लगानी चाहिए। इससे लोग आसानी से आ जा सकेंगे और जो अवैध वसूली हो रही है उस पर रोक लग जाएगी। सही मायने में देखा जाए तो प्रशासन भी इस समस्या पर कोई खास ध्यान नहीं दे रहा है। और तो और जनप्रतिनिधि भी जनता की इस समस्या पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। कुछ लोग तो मौके पर जनप्रतिनिधियों को गालियां देते भी नजर आए। ऐसी गालियां जिन्हें सार्वजनिक करने में भी मुझे शर्म आ रही है। मजेदार बात तो यह है कि हर वर्ष बाढ़ का रुख पलिया की तरफ ही बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण है बालू खनन। बालू का खनन यदि शारदा नदी से किया जाता तो जाहिर सी बात है कि नदी की सफाई होती और बाढ़ का पानी नदी के रास्ते निकल जाता। परन्तु खनन तो उस जगह से किया जाता है जहां पर नदी है ही नहीं। जिस कारण जमीन खलिहान बन गयी है और बाढ़ का पानी उसी तरफ का रुख अपना लेता है। जिस कारण पलिया नगर टापू बन चुका है। यदि समय रहते खनन पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में स्थिति इससे भी भयावह हो जाएगी। ठीक उसी तरह, जिस तरह से आबादनगर और बरबादनगर गांव कभी आबाद हुआ करते थे। बाढ़ की भेंट चढ़ जाने के बाद आज उन गावों के नाम मात्र कागजों पर ही रह गये हैं।





