रेल विभाग के तुगलकी फरमान की सजा भुगत रही कुर्रैया क्षेत्र की जनता
बड़ी-बड़ी डींगें मारने वाले दिग्गज नेता एवं रसूखदार भी नहीं उठा सके थे जनहित की आवाज

रेल विभाग के तुगलकी फरमान की सजा भुगत रही कुर्रैया क्षेत्र की जनता
बड़ी-बड़ी डींगें मारने वाले दिग्गज नेता एवं रसूखदार भी नहीं उठा सके थे जनहित की आवाज

(निर्जेश मिश्र “सम्पादक”)
सावधान इण्डिया न्यूज, पीलीभीत। इसे कहते हैं तुगलकी फरमान और जनता के भोलेपन का नाजायज फायदा। जो रेलवे विभाग ने किया। पीलीभीत जिले में पीलीभीत-मैलानी रेल प्रखण्ड पर एक हाल्ट है, जो कुर्रैया खुर्द कलां के नाम से प्रचलित है। इससे पूर्व यह स्टेशन थी, जिसे वर्ष 2011 में हाल्ट बना दिया गया था। हाल्ट बनते ही रेलवे विभाग ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए और क्षेत्रीय जनता के भोलेपन का नाजायज फायदा उठाते हुए पूर्वी रेलवे फाटक को बन्द करा दिया था। जबकि पश्चिमी रेलवे फाटक की अपेक्षा पूर्वी रेलवे फाटक से आवागमन ज्यादा होता था। रेल विभाग के इस तुगलकी फरमान का क्षेत्रीय जनता विरोध भी नहीं कर सकी। कुर्रैया स्थित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय, हाइडिल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को जाने के लिए यही रेलवे फाटक सुविधाजनक था। इस रेलवे फाटक से क्षेत्र के ग्राम रसूलापुर, महादेव, माती, मुरादपुर, सुलतानपुर, पिपरा, सपहा, चतीपुर, हरीपुर, जाजीपुर, तारकोठी, किशनपुर, महाराज नगर व बागर सहित कई दर्जन गांवों की जनता का आवागमन होता था। हालांकि यह फाटक हाल्ट बनने से लगभग एक साल पहले ही बन्द कर दिया गया था। जब कोई इस सम्बन्ध में जानकारी करता था तो रेल विभाग कर्मचारी न होने की बात कहकर और शीघ्र खोले जाने का आश्वासन देकर अपना पल्ला झाड़ लेता था। धीरे-धीरे समय बीतता गया और एक दिन वह समय भी आ गया जिस दिन रेल विभाग ने फाटक को उखाड़कर उसे बिल्कुल हटा दिया। जिस वजह से आज क्षेत्रीय जनता को आने-जाने के लिए बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस समय रेलवे फाटक को बन्द किया गया था उस समय क्षेत्र में दिग्गज नेताओं और बड़े-बड़े रसूखदारों का बोलबाला था। जो लम्ब-लम्बी डींगें तो बहुत मारते थे, लेकिन किसी ने भी जनहित के लिए आवाज उठाना उचित नहीं समझा। जिसका खामियाजा क्षेत्र की जनता आज भी भुगत रही है और आगे भी भुगतेगी।





