प्रेम प्रसंग, पंचायत और प्रतिशोध की तालिबानी सोच
चांद पर पहुंचने वाले देश मे महिला उत्पीड़न का अजीब मामला जिसने पहुंचाया जेल

प्रेम प्रसंग, पंचायत और प्रतिशोध की तालिबानी सोच
चांद पर पहुंचने वाले देश मे महिला उत्पीड़न का अजीब मामला जिसने पहुंचाया जेल
ब्यूरो, जिस देश मे नारियों को अव्वल दर्जा दिया गया हो, जहाँ नारयस्तु पूजयन्ते का नारा बुलंद किया जाता हो वहीं प्रेम मे पड़ी महिला के मुंह पर कालिख पोतना क्या संदेश देता है ये आत्म मंथन ने का विषय है। वैसे किसी विवाहिता को अपनी मर्यादा का उल्लंघन करने से पहले हजार बार सोचना चाहिए क्यू की इससे एक नही दो परिवार बर्बाद होते है। प्रतापगढ़ जनपद के हथिगवा थाना क्षेत्र मे हुयी घटना समाज की उस विकृत सोच को दर्शाता है जहां हम आधुनिक और प्रगतिशील विचारों के धनी तो है लेकिन किसी महिला के प्रेम सम्बन्ध वाले विषय पर हम आज भी प्राचीन सोच वाले बन जाते है। निशा नाम की एक महिला का गांव के ही एक युवक से प्रेम सम्बन्ध हो जाता है इस प्रसंग उपजे क्रोध और क्रूर सोच ने आज इब्राहिमपुर गांव को सन्नाटे की आगोश मे ले लिया है। बड़े शायद ये भूल गये उनकी एक अमानवीय हरकत मासूमों की सोच पर कितना असर डालेगी और इसका दूर का परिणाम कितना गलत होगा।
आखिर किसी महिला के प्रति जिम्मेदारी सिर्फ उसके पति की होती है या पूरे गांव की, न्यायाधीश बने लोग और उन्मादी भीड़ ने एक नारी के साथ जिस तरह का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार किया उसकी निंदा के आलावा और क्या किया जा सकता है। सूचना पर पंहुची पुलिस के साथ मारपीट पर आमादा भीड़ ने न सिर्फ कानून व्यवस्था को चुनौती दिया बल्कि ये साबित कर दिया की इनकी सोच, इनका विचार और इनके द्वारा किया गया कार्य एक सोची समझी साजिश थी और इसके लिए ये पुरी तरह से जिम्मेदार हैं। हथिगवा के थाना प्रभारी नंद लाल सिंह द्वारा दी गयी लिखित सूचना का अगर बारीकी से अध्ययन किया जाये तो एक बात जरूर समझ मे आती है की हो सकता है कि अगर पुलिस समय पर पहुँच कर मामले मे हस्तक्षेप न करती तो मामला और भी गंभीर हो सकता था। 25 ज्ञात और इतने ही अज्ञात लोगों के विरद्ध पुलिस ने मामला दर्ज करके 17 आरोपिओं को हिरासत मे ले लिया। सभी लोगों को जेल भेज दिया गया जहाँ वह अपने किये पर आराम से मंथन करेंगे। यहाँ इज बात और सामने आयी है कि आरोपिओं से जुड़े लोग मीडिआ पर भी ऊँगली उठाने से बाज नही आये उनका ये मानना था कि अगर मीडिआ तेजी न दिखाती तो हो सकता था कि मामला किसी तरह निपट जाता। अब उन्हे शायद ये भान नही है कि सूचना के क्रांतिकारी दौर मे उनकी ये सोच कितनी उचित है। समाज एक महिला के साथ तालिबानी रवैया अपनायेगा और मीडिआ तक बातें नही पहुंचेगी और वो ऐसे ही मामले से छुट जाएंगे। कुल मिलाकर प्रेम प्रसंग मे इतना कठोर पंचायती निर्णय और खुद न्यायाधीश बनने के अहम ने आज दो दर्जन से अधिक परिवारों के उपर तलवार टांग दिया है। कानून अपना काम कर रहा है मामले से जुड़े सभी आरोपी जेल भेजे जाएंगे इसमे कोई संदेह नही है। सोचना होगा ऐसे क्रूर सोच वाले लोगों को कि किसी भी मामले मे खुद कानून बनने कि सोच का क्या परिणाम हो सकता है।





