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उत्तर प्रदेश

पराली जलाने के मामले में हो रहे किसानों का उत्पीड़न बर्दास्त नहीं : किसान नेता

- किसान नेता अंजीन दीक्षित ने मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली को भेजा पत्र

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पराली जलाने के मामले में हो रहे किसानों का उत्पीड़न बर्दास्त नहीं : किसान नेता

– किसान नेता अंजीन दीक्षित ने मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली को भेजा पत्र


(पंकज शुक्ला)
गोलागोकरननाथ-खीरी। गन्ने की पत्ती व पराली जलाने पर प्रशासन द्वारा लगाई जा रही रोक से किसानों को हो रही परेशानी को देखते हुए किसान नेता ने मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली को एक लिखन किसानों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिला अध्यक्ष अंजनी दीक्षित ने मुख्य न्यायाधीश को खिले पत्र में बताया है कि वर्तमान समय में गन्ने की पत्ती किसानों के खेतों में पड़ी है और किसानों को गेहूं की बुवाई करनी है। शासन-प्रशासन द्वारा गन्ने की पत्ती जलाने पर रोक लगाते हुए माननीय न्यायालय के आदेश का हवाला दिया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि गन्ने की पत्ती अत्यंत जलनशील है, जिसको जलने से धुआं नहीं होता है। शासन प्रशासन माननीय न्यायालय का हवाला देकर पत्ती जलाने पर रोक तो लगा दी, लेकिन कोई उपाय किसानों को नहीं बताया। न्यायालय का आदेश है कि 14 दिन में गन्ने का भुगतान होना चाहिए। अविलंब भुगतान पर किसानों को 15 फीसदी ब्याज मिलना चाहिए, जिसका अनुपालन शासन-प्रशासन नहीं कर पा रहा है। जिस वजह से गन्ना किसान कर्ज के दलदल में चला गया है। किसान समाज को खाद्यान्न देने के साथ-साथ अपने पेड़-पौधों और फसलों से 12 माह ऑक्सीजन देने का काम करता। एक दिन पत्ती जला दी तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसका सट्टा निलंबित कर दिया जाता है। पत्र में कहा गया है कि अगर किसानों द्वारा पत्ती जलाने पर प्रदूषण होता तो गांव में होता, दिल्ली महानगर यहां से 550 किलोमीटर दूर है। ऐसे में यहां का प्रदूषण दिल्ली तक कैसे पहुंच सकता है। सरकार को प्रदूषण उत्पन्न करने वाले सही कारणों की जांच करानी चाहिए। निर्दोष किसानों को प्रदूषण का दोषी न ठहराया जाए। सरकार को यदि गन्ने की पत्ती जलने पर रोक लगानी है तो गन्ना बाहुल्य क्षेत्र में ऐसा संयंत्र लगाएं जाएं, जिससे गन्ना पत्ती रोजगार का साधन बने। गन्ने की पत्ती की बंडल बनाकर फैक्ट्री आदि उद्योगों में उसका प्रयोग किया जा सके। पत्र के माध्यम से अनुरोध किया गया है कि सरकार को निर्देशित करते हुए किसानों को प्रदूषण का दोषी न ठहराया जाए।


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