बेहूदा एवं फूहड़ गाने बजाने वाले कांवरियों के विरुद्ध होनी चाहिए कार्रवाई
बेहूदा एवं फूहड़ गाने बजाने वाले कांवरियों के विरुद्ध होनी चाहिए कार्रवाई

बेहूदा एवं फूहड़ गाने बजाने वाले कांवरियों के विरुद्ध होनी चाहिए कार्रवाई

(निर्जेश मिश्र “सम्पादक”)
मित्रों बहुधा देखा गया है कि कांवर यात्रा पर जाते समय शिव भक्त फिल्मी धुन पर बेहूदा गाने बजाते हुए चलते हैं। जैसे कि “भांग तनि पीस दे गौरा” “क्यों खड़ी-खड़ी तू हाले रे गौरा चाल कसूती चालै” “आज करके चोटी ढीली, भोले भांग मने भी पीली” “भोले तेरी भांग की घुटाई मार गी, गौरा तेरी रोज की लड़ाई मार गी। क्या है ये, कैसे-कैसे गाने बजाते हैं लोग। क्या इसी को भक्ती कहते हैं। ऐसे भक्त हमारे देश में पैदा हो गये हैं जो हमारे त्रिलोकीनाथ भगवान भोलेनाथ को ही बदनाम करने में जुटे हुए हैं। क्या भोलेनाथ भंगेड़ी, नशेड़ी और गंजेड़ी हैं ? कहां किस ग्रन्थ और शास्त्र में लिखा हुआ है कि शंकर भगवान भांग का सेवन करते थे और माता पारवती उनके लिए भांग पीसती थीं। शिवपुराण में कहीं से कहीं तक उल्लेख नहीं किया गया है कि भोलेनाथ भांग पीते थे। यह सब अज्ञानतावश बेहूदा गाने बनाकर हमारे सनातन धर्म के देवी-देवताओं का उपहास किया जा रहा है। सरकार विभिन्न प्रकार के कानून लागू करती है, परन्तु आज तक ऐसे लोगों के लिए कोई कानून नहीं बने, जिससे हमारे देवी-देवताओं का उपहास न हो सके। ऐसे लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जरा सोचिए कि आप नशा नहीं करते हैं और आपको कोई नशेड़ी, गंजेड़ी कहने लगे तो क्या आपको गुस्सा नहीं आएगा। ठीक इसी प्रकार भोलेनाथ को जब नशेड़ी, गंजेड़ी और भंगेड़ी कहेंगे तो उन्हें क्रोध नहीं आता होगा। फिर कहते हैं कि कांवरियों से भरी ट्राली जा रही थी, एक्सीडेंट हो गया। इसीलिए यह सब घटनाएं घटित होती हैं। हमारे आराध्य देव आपसे स्वयं चलकर कहने नहीं आएंगे, वो तो बस अपने तरीके से ही हमें हमारे अपराधों की सजा देंगे। वह कोई थाना चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराने नहीं जाएंगे, वह स्वयं निर्णय ले लेते हैं कि हमें किसको क्या दण्ड देना है। किसी भी कांवरियों की टोली के साथ लाउडस्पीकर पर आपने नमामीशमीशान निर्वाण रूपं…. नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाए भस्मांगरागाय महेश्वराय, नित्यायै शुद्धायै दिगंबरायै तस्मै नकाराय नम: शिवाय या फिर शिव चालीसा, शिव महिमा और शिव आरती जैसे धार्मिक स्वर नहीं सुने होंगे। यह सब जानकारी का अभाव है। हमारे धर्म में प्रचलित धार्मिक पुस्तकों का जब अध्ययन नहीं किया जाएगा तो यही होगा। इसी तरह से समाज में कुरीतियां फैलेंगी और देवी-देवताओं का उपहास होता रहेगा। इसीलिए आप सभी से हमारा निवेदन है कि धार्मिक कार्य करें, परन्तु बेहूदा गाने न बजाएं। अच्छे धार्मिक भजन, स्तुति, स्तोत्र, चालीसा एवं आरती आदि का गान करें और सुनें। तभी जीवन सार्थक होगा और किए गये पूजा-पाठ का फल प्राप्त होगा। हां यदि मनोरंजन ही करना है तो चार नर्तकियां बुला लो पूरी रात नृत्य कराओ, डांस पार्टी का आनन्द लो। धार्मिक कार्यों में व्यर्थ पैसा मत खर्च करो। यदि भक्ती के नाम पर मनोरंजन करके देवी-देवताओं का उपहास करोगे तो सिर्फ हानि के सिवा कभी कोई लाभ नहीं मिलने वाला। यह सत्य है इसमें कहीं से कहीं तक कोई संदेह नहीं है।





