लखीमपुर खीरी : दुधवा के घने जंगलों से निकले बाघ और तेंदुओं के आतंक से सहमे ग्रामीण, अधिवक्ता अमित महाजन ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
पिछले कुछ समय से जंगली जानवरों ने जंगलों को छोड़कर रिहाइशी इलाकों और खेतों में अपना डेरा जमा लिया है


पलिया कलां दुधवा टाइगर रिजर्व की तलहटी में बसे तराई क्षेत्र पलिया तहसील के ग्रामीण और शहरी इलाकों में खूंखार जंगली जानवरों का आतंक चरम पर है। आए दिन बाघ, तेंदुए और हाथियों द्वारा किए जा रहे हमलों से बढ़ती जनहानि पर गहरा रोष जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता अमित महाजन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मांग पत्र भेजकर प्रभावी कार्यवाही की मांग की है।
बता दे अमित महाजन ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पलिया तहसील का बड़ा हिस्सा दुधवा से सटा हुआ है। पिछले कुछ समय से जंगली जानवरों ने जंगलों को छोड़कर रिहाइशी इलाकों और खेतों में अपना डेरा जमा लिया है। विशेषकर बाघ और तेंदुए अब केवल रात में ही नहीं, बल्कि दिनदहाड़े भी किसानों, महिलाओं और मासूम बच्चों को अपना निवाला बना रहे हैं। जंगली हाथियों के झुंड भी किसानों की कड़ी मेहनत से उगाई गई फसलों को तहस-नहस कर रहे हैं। जंगल के रास्तों और गांवों को जोड़ने वाले मार्गों पर राहगीरों पर अचानक जानलेवा हमले हो रहे हैं, जिससे कई परिवार अपनों को खो चुके हैं।
बार-बार होने वाली इन घटनाओं से क्षेत्र की जनता में वन विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी और भय व्याप्त है। पूर्व में कई बार पार्क मुख्यालय पर नागरिकों द्वारा धरना-प्रदर्शन भी किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थाई समाधान नहीं निकला है। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में अधिवक्ता महाजन ने मांग की है कि वन विभाग और पार्क प्रशासन को अविलंब निर्देशित किया जाए कि वे रिहाइशी इलाकों में जानवरों के प्रवेश को रोकने हेतु आवश्यक कदम उठाएं और हिंसक हो चुके जानवरों को चिन्हित कर उन्हें आबादी से दूर करें ताकि नागरिकों के जान-माल की रक्षा हो सके।





