दलाली और तस्करी की चादर में लिपटा तथाकथित पत्रकार ग्रुपों पर डाल रहा अपना आईडी कार्ड
- व्हाट्सऐप ग्रुपों पर अपना आईडी कार्ड डालकर अपने को साबित करना चाहता है ईमानदार और सम्मानित पत्रकार

दलाली और तस्करी की चादर में लिपटा तथाकथित पत्रकार ग्रुपों पर डाल रहा अपना आईडी कार्ड
– व्हाट्सऐप ग्रुपों पर अपना आईडी कार्ड डालकर अपने को साबित करना चाहता है ईमानदार और सम्मानित पत्रकार

(निर्जेश मिश्र/सुमित गुप्ता)
गौरीफंटा-खीरी। गौरीफंटा में भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी और तमाम अवैध कार्यों में लिप्त एक तथाकथित पत्रकार अब अपना आईडी कार्ड ग्रुपों पर पोस्ट करके अपने को भला और ईमानदार पत्रकार साबित करना चाहता है। पूर्व में इस तथाकथित दलाल पत्रकार पर कई गम्भीर आरोप लग चुके हैं।
बता दें कि हमारे भारत देश के लोकतन्त्र में चार स्तम्भ हैं, जिसमें पहले स्तम्भ का नाम है विधायिका। इस सतम्भ के अन्तर्गत संसद और विधानसभाएं आती हैं। इनका कार्य कानून बनाने का होता है। दूसरे स्तम्भ को कार्यपालिका के नाम से जाना जाता है। इस सतम्भ के अन्तर्गत मंत्रिपरिषद आता है। मंत्रिपरिषद का कार्य विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन कराना होता है। तीसरे स्तम्भ का नाम न्यायपालिका है, जिसके अन्तर्गत सर्वोच्च न्यायालय एवं राज्यों के उच्च न्यायालय आते हैं। इस स्तम्भ का कार्य विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिक विवेचना करना और कार्यपालिका द्वारा बनाए गए कानूनों के पालन करने में मनमानी को रोकना होता है। तीसरे स्तम्भ को पत्रकारिता का नाम दिया गया है। इसके अन्तर्गत प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आती है। इसका कार्य मुख्य रूप से उपरोक्त तीनों स्तंभों के कार्यों पर नजर रखना होता है। जब एक पत्रकार दलाली और तस्करी जैसे अपराधों में लिप्त हो जाएगा तो वह उपरोक्त तीनों स्तम्भों के कार्यों पर नजर कैसे रख पाएगा। इसीलिए आज के समय में पत्रकारिता की छवि धूमिल हो चुकी है और अधिकारी/कर्मचारी मीडिया को नजरंदाज करने लगे हैं। लोकतंत्र में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है जनमत, मीडिया जनमत निर्माण का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य करता है। परंतु हमारे देश का दुर्भाग्य है कि अधिकांश मीडिया हाउस विदेशी शक्तियों द्वारा संचालित हो रहे हैं। वे देश की नकारात्मक छवि पेश करके दुनिया में हमें बदनाम करते रहते हैं। इसी तरह का एक तथाकथित पत्रकार गौरीफंटा में भारत-नेपाल सीमा पर भी तैनात है, जो किसी एक समाचार पत्र से तहसील स्तर का प्रेस कार्ड बनवाकर घूम रहा है। प्रेस कार्ड का सहारा लेकर यह तथाकथित पत्रकार बार्डर पर तैनात सुरक्षा ऐजेंसियों के बीच अपनी पत्रकारिता का रौब गांठता फिर रहा है। इसके अलावा यह इण्डो-नेपाल बार्डर पर लम्बे समय से तस्करी जैसे विभिन्न अपराधों को अंजाम दे रहा है। अपराधों को अंजाम देने के लिए अपने को पत्रकार कहने वाला यह दलाल नेपाली सिम का प्रयोग कर रहा है, जिसका नम्बर 009779822662969 है। इस नम्बर के अलावा अन्य कई नेपाली नम्बरों का भी यह दलाल प्रयोग कर रहा है। ऐसे पत्रकारों और नेपाली सिम का प्रयोग करने वालों की जांच कराकर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही समाचार पत्रों के संस्थापकों एवं संपादकों को ऐसे लोगों का प्रेसकार्ड निरस्त करते हुए तत्काल प्रभाव से निष्काशित कर देना चाहिए। साथ ही अपने समाचार पत्र में सम्बन्धित के कृत्यों का उल्लेख करते हुए एक सूचना प्रकाशित कर उसे सार्वजनिक कर देना चाहिए, ताकि समाज भी ऐसे पत्रकार के बारे में अच्छे से जान ले और उससे हमेशा सतर्क रहे। जब तक सम्बन्धित अधिकारी इस मामले को गम्भीरता से नहीं लेंगे, तब तक बार्डर पर हो रही अवैध गतिविधियों एवं दलाली पर अंकुश लग पाना संभव नहीं हो पाएगा।







