गमगीन माहौल में हुआ पालिकाध्यक्ष केबी गुप्ता का अन्तिम संस्कार
शोक संवेदना व्यक्त करने एवं अन्तिम शव यात्रा में शामिल होने वालों का लगा तांता, श्मशानघाट पर ही उपचुनाव की चर्चाएं करते नजर आए कुछ भावी प्रत्याशी

गमगीन माहौल में हुआ पालिकाध्यक्ष केबी गुप्ता का अन्तिम संस्कार
शोक संवेदना व्यक्त करने एवं अन्तिम शव यात्रा में शामिल होने वालों का लगा तांता, श्मशानघाट पर ही उपचुनाव की चर्चाएं करते नजर आए कुछ भावी प्रत्याशी


(निर्जेश मिश्र ‘‘सम्पादक’’)
पलियाकलां-खीरी। नगर पालिका के चेयरमैन केबी गुप्ता का मंगलवार की देर रात्रि आकस्मिक निधन हो गया था। मौत की सूचना होते ही पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गयी। शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का उनके आवास पर तांता लग गया। बुधवार की सुबह भीरा रोड शारदा तट पर स्थित श्मशान घाट पर गमगीन माहौल में उनका अन्तिम संस्कार किया गया। पंचतत्व में विलीन हुए पालिकाध्यक्ष की अन्तिम शव यात्रा में शामिल होने वालों की भारी भीड़ लग गयी। हजारों की संख्या में पहुंचे उनके चिर-परिचित एवं नाते-रिश्तेदारों ने गहरा शोक व्यक्त किया। बता दें कि केबी गुप्ता लगभग साठ वर्ष के थे। चेयरमैन के अतिरिक्त वह एक अच्छे अधिवक्ता भी थे और लगभग पैंतीस साल की राजनीतिक में उन्होंने अपनी अच्छी पहचान बनाई हुई थी। वह अपने पीछे दो पुत्रों और एक पुत्री को छोड़कर गये हैं। उनका बड़ा बेटा वरुण गुप्ता इंजीनियर होने के साथ-साथ अधिकांश उनके साथ ही रहता था और छोटे बेटे का नाम आकाश गुप्ता है, जो बरेली जिला में जज के पद पर तैनात हैं। हालांकि अभी तक तीनों बच्चों में से किसी की भी शादी नहीं हुई है। अचानक हुई पालिकाध्यक्ष की मौत से उनका परिवार पूरी तरह से टूट चुका है। उनके आवास पर परिजनों को ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा हुआ है। एक ओर जहां पालिकाध्यक्ष की मौत से नगर से लेकर उनके परिवार एवं नाते-रिश्तेदारों तक में शोक छाया हुआ है, वहीं दूसरी ओर नगर में उपचुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं। केबी गुप्ता का निधन होते ही उपचुनाव के लिए कुछ लोगों ने जोरशोर से तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। पालिकाध्यक्ष के अन्तिम संस्कार के दौरान श्मशानघाट पर ही कुछ भावी प्रत्याशी उपचुनाव की चर्चाएं करते नजर आए। मित्रों हमारे देश की विडम्बना तो देखिए कि एक इंसान इस दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए विदा हो गया और लोगांें को उपचुनाव की पड़ी हुई है। यह निश्चित है कि पालिकाध्यक्ष की मृत्यु के बाद उपचुनाव तो होगा ही, लेकिन यह चर्चाएं और तैयारियां अन्तिम संस्कार कराने के बाद फुर्सत में भी हो सकती हैं। इसके अलावा अन्तिम संस्कार के दिन भी नगर में उन लोगों के प्रतिष्ठान खुले नजर आए, जो पालिकाध्यक्ष के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलते थे और उनके बहुत करीबी थे। मित्रों बहुधा देखा गया है कि लोग इंसानों से तब तक मतलब रखते हैं, जब तक उससे उनका कोई स्वार्थ होता है। मौत होते ही सारे रिश्ते-नाते और व्यक्तिगत व्यवहार को लोग दरकिनार करके अपने फायदे में लग जाते हैं। ऐसा ही कुछ माहौल पालिकाध्यक्ष केबी गुप्ता के निधन के बाद नगर में देखने को मिल रहा है।





