भारत-नेपाल सीमा पर अपराधों को अंजाम देने के लिए धड़ल्ले से संचालित हो रहे नेपाली सिम
सर्वाधिक रूप से गौरीफंटा में हो रहा नेपाली सिमों का प्रयोग, पुलिस व अन्य सुरक्षा ऐजेंसियां मौन

भारत-नेपाल सीमा पर अपराधों को अंजाम देने के लिए धड़ल्ले से संचालित हो रहे नेपाली सिम
– सर्वाधिक रूप से गौरीफंटा में हो रहा नेपाली सिमों का प्रयोग, पुलिस व अन्य सुरक्षा ऐजेंसियां मौन

(निर्जेश मिश्र ‘‘सम्पादक’’)
सावधान इण्डिया न्यूज, लखीमपुर-खीरी। भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ रहे अपराधों का कारण नेपाल सिम हैं। नेपाली सिमों का उपयोग करके अपराधी अपने कार्यो को बड़ी आसानी से अंजाम दे रहे हैं। सर्वाधिक रूप से नेपाली सिमों का उपयोग पलिया तहसील क्षेत्र के गौरीफंटा में किया जा रहा है। इसके बाद भी इंडो-नेपाल बार्डर तैनात पुलिस और अन्य सुरक्षा ऐजेंसियां इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही हैं।
बता दें कि जिले की पलिया तहसील क्षेत्र के गौरीफंटा में पूर्व में भारतीय नेटवर्क न होने के कारण सरकारी विभागों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जिस कारण नेपाली सिम प्रयोग में लाए गए थे। उसके बाद इस समस्या को मद्देनजर रखते हुए गौरीफंटा क्षेत्र में जिओ का टॉवर लगवाया गया, ताकि सरकारी विभागों एवं आम जनता को एक दूसरे से सम्पर्क करने में कोई परेशानी न हो और नेपाली सिम का सहारा न लेना पड़े। परन्तु आज भी गौरीफंटा में नेपाली सिमों का प्रयोग पूर्व की भांति ही किया जा रहा है। गौरीफंटा बार्डर से सम्पर्क में रहने वाले लगभग हर व्यक्ति के पास नेपाली सिम चल रहा है। एक तरफ कुछ लोग नेपाली सिम का प्रयोग व्यापार से सम्बन्धित कार्यों के लिए कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग नेपाली सिम का प्रयोग केवल तस्करी करने के लिए कर रहे हैं। गौरीफंटा में सक्रिय तस्करों के तार सीधे नेपाली तस्करों के जुड़े रहते हैं। जिस कारण अपराधियों के लिए नेपाली सिम काफी आरामदायक है, क्योंकि भारतीय सिम से यदि नेपाल से सम्पर्क किया जाता है तो अन्तर्राष्ट्रीय कॉल लगती है, जिसका चार्ज लगभग नौ रूपये प्रति कॉल कटता है। नेपाली सिम से सम्पर्क करने पर कॉल चार्ज नॉर्मल ही लगता है। यही प्रमुख कारण है, जिससे सीमा पर अवैध गतिविधियों पर नजर रख पाना एवं तस्करी पर अंकुश लगा पाना सुरक्षा ऐजेंसियों के लिए चुनौती साबित हो रहा है। यदि कोई भी अपराध नेपाली सिम का सहारा लेकर किया जाता है तो उस नम्बर का पता लगाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता है। यदि नेपाल में उसी सिम के विरूद्ध कोई कार्रवाई की जाती है तो वह नम्बर फर्जी आईडी से खरीदा हुआ पाया जाता है। जिस कारण असली आरोपी तक सुरक्षा ऐजेंसियां नहीं पहुंच पाती हैं। मजेदार बात तो यह है कि गौरीफंटा में भारत-नेपाल सीमा पर तमाम सुरक्षा ऐजेंसियां तैनात हैं, लेकिन कोई भी नेपाली नम्बरों के भारत में प्रयोग होने पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए प्रयासरत नहीं हैं। गौरीफंटा में नेपाली नम्बरों की जांच होनी चाहिए और नेपाली सिम प्रयोग करने वाले भारतीय के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिस दिन गौरीफंटा में नेपाली सिम के प्रयोग पर प्रतिबन्ध लग जाएगा, निश्चित रूप से उसी दिन से बार्डर पर हो रही तस्करी और अन्य अपराधों पर अंकुश लग जाएगा।





