गौरीफंटा बार्डर पर नेपाली नागरिकों से जमकर की जा रही अवैध वसूली
पलिया से गौरीफंटा तक जाने वाली बसों में जोखिम भरा यात्रा करते हैं यात्री, नहीं हो रही कोई कार्रवाईं

जनता पर भारी पड़ सकती है परिवहन विभाग की लापरवाही
पलिया से गौरीफंटा तक जाने वाली बसों में जोखिम भरा यात्रा करते हैं यात्री, नहीं हो रही कोई कार्रवाईं

(निर्जेश मिश्र)
लखीमपुर-खीरी। पलिया तहसील क्षेत्र के गौरीफंटा में भारत-नेपाल सीमा से सवारियां भरकर चलने वाली निजी बसों द्वारा यात्रियों की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके बाद भी परिवहन विभाग मौन धारण किए हुए है।
बता दें कि गौरीफंटा बार्डर से तमाम नेपाली नागरिक रोजी-रोटी कमाने के लिए अपने देश से भारत आते हैं। भारत में यह लोग दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मुम्बई और रूड़ू जैसे स्थानों पर जाकर मेहनत मजदूरी करते हैं। उसके बाद भारत से नेपाल के लिए वापसी भी करते हैं। जिसके लिए उन्हें भारतीय बसों का सहारा लेना पड़ता है। जिसका भरपूर फायदा टिकट माफिया उठाते हैं। टिकट गैंग नेपाल से भारत जाने वाले नागरिकों को जबरन बेंगलुरु, दिल्ली व मुंबई तक के टिकट काट देते हैं और किराया दो से तीन गुना वसूलते हैं। उसके बाद उन्हें बसों में जबरन ठूंस कर पलिया तक भेज दिया जाता है। कई बार तो ऐसा होता है कि नेपाली नागरिकों को साधन न मिलने के कारण अपनी रातें सड़कों पर गुजारनी पड़ती हैं। मौके पर मौजूद कुछ लोग यह बता सकते हैं कि किस तरह से रोडवेज वाहन न होने के कारण मजबूरन डग्गामार वाहनों में जोखिम भरा सफर करना पड़ता है। गौरीफंटा बॉर्डर से पलिया तक जाने वाली सड़क सिंगल है, जिस पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। इसके बाद भी परिवहन विभाग इस तरह के डग्गामार वाहनों पर मेहरबान है।






