पकड़े गए खाद्यान्न की जांच धीमी,रिपोर्ट में किसान का दर्शाया गया गेहूं, लीपापोती कर थाने से भी रिलीज हो गया गल्ले से भरा ट्रक

निघासन-खीरी।
सरकारी गल्ले की दुकान पर उतरने वाले गेहूं को आढ़त में उतारते समय तहसीलदार द्वारा पकड़े जाने के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में दब गया है। हालांकि पांच दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई सिफर रही। जबकि मौके पर तहसीलदार भीमचंद व नायब तहसीलदार दिव्याशू शाही ने तीस बोरिया बंद करीब पैंतीस कुंतल गेहूं की खेप को झंडी रोड कोटेदार की आढ़त से रंगेहाथ बरामद किया था।
जानकारी मुताबिक मंगलवार को पांच सदस्यीय गठित टीम ने रिपोर्ट तैयार करके शासन को भी भेज दी है। इधर गल्ले से भरा ट्रक थाने से रिलीव होने के बाद लोगों में कार्रवाई के कयास कम लगाए जा रहे है।
बताते चले की निघासन झंडी मार्ग पर कोटेदार धनीराम गुप्ता की आढ़त है।इसी आढ़त से करीब पचास कुंतल खाद्यान्न तहसीलदार निघासन ने रविवार को छापेमारी के दौरान बरामद किया था।ट्रक में गेहूं को भरवा कर कोतवाली परिसर में खड़ा कर दिया।मंगलवार को पांच सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू की।देर शाम रिपोर्ट तैयार करने के बाद उच्चाधिकारियों समेत शासन को भेज दी गई।हालांकि करीब पांच दिन बीत जाने के बाद भी जांच की आंच दोषियों पर नहीं आई वहीं सूत्र बताते हैं कि यह गेहूं सरकारी बोरी में सील बंद आया था,जिसका ऊपरी मोहरा चाकू आदि से लेवर काट कर सरकारी बोरी से गेहूं बाहर निकाल रहे थे।तभी तहसील के अधिकारी मौके पर आ धमके थे और खाली हुई गेहूं की सरकारी बोरिया व भरी बोरियां किसी अज्ञात के द्वारा गायब करवा कर दूसरी बोरियां रख दी गयी।
क्या बोले जिम्मेदार!
इस बाबत में जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि वो सरकारी गल्ला नहीं था उसकी जांच हो गई थी।किसान ने गल्ला बेंचा था।इसमें आढ़तिया की कोई नहीं गलती है उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है हालांकि वह कोटे का गल्ला नहीं था कोटे से उसका कोई मतलब नहीं है 1लाख 60 हजार कुंतल सरकारी बोरियां,03 लाख 20 हजार बोरियां हर महीने जाती है।जब तक बोरियों के ऊपर फ्लैप नहीं लगा मिलेगा तब तक उसे कैसे प्रूफ कर पाएंगे वही किसान खड़ा होकर बता रहा है तो कैसे मान ले कि गेहूं सरकारी है।








