सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की छवि धूमिल करने पर होती है त्वरित कार्रवाई
- पत्रकार की छवि धूमिल करने के मामले में कार्रवाई करने के लिए पलिया पुलिस को नहीं मिल रही कोई धारा

सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की छवि धूमिल करने पर होती है त्वरित कार्रवाई
– पत्रकार की छवि धूमिल करने के मामले में कार्रवाई करने के लिए पलिया पुलिस को नहीं मिल रही कोई धारा
पलियाकलां-खीरी। यदि किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से पोस्ट करके उसकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जाता है तो पुलिस कार्रवाई करने में जरा भी देरी नहीं करती। परन्तु जब किसी साधारण व्यक्ति अथवा पत्रकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जाता है तब पुलिस का जवाब होता है कि इसके लिए ऐसी कोई धारा समझ नहीं आ रही, जिसमें मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा सके।
बता दें कि अभी हाल ही में पलिया नगर के एक सम्मानित पत्रकार के लिए व्हाट्सऐप के ‘‘सारथी जनसेवा ग्रुप’’ पर एक अमानवीय पोस्ट करके छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया था। हालांकि पोस्ट एक नेपाली नम्बर नम्बर से की गई थी। की गई पोस्ट से पत्रकार के मान-सम्मान को काफी ठेस पहुंची और नगर के तमाम पत्रकारों ने पलिया पुलिस को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई करने की मांग की थी। पत्रकारों ने मांग की थी कि ग्रुप एडमिन रूपेश बाबा गुप्ता से पूछतांछ करके पोस्ट करने वाले नेपाली नम्बर का पता लगाकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस पर प्रभारी निरीक्षक विवेक उपाध्याय ने कार्रवाई करने का आश्वासन तो दे दिया था, परन्तु एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। इस सम्बन्ध में जब पलिया प्रभारी निरीक्षक से दोबारा बात की गई तो उनका स्पष्ट जवाब यह था कि इस मामले में कार्रवाई करने के लिए कोई धारा उनके समझ में नहीं आ रही है, जबकि इस सम्बन्ध में वार्ता करने पर अपर पुलिस अधीक्षक नैपाल सिंह ने बताया था कि इस तरह से किसी की छवि धूमिल नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया था कि वह पलिया पुलिस से वार्ता करेंगे और निश्चित रूप से कार्रवाई भी की जाएगी। इसके बाद भी पलिया पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि सम्बन्धित ग्रुप एडमिन को पूछतांछ के लिए कोतवाली बुलाया गया है, लेकिन वह नहीं आया। जबकि ग्रुप एडमिन पलिया नगर में खुलेआम घूम रहा है, लेकिन पुलिस उससे कोई पूछतांछ नहीं कर पा रही है। अभी हाल ही में नगर के पीडब्ल्युडी गेस्ट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ग्रुप एडमिन को देखा गया था। इतना ही नहीं नगर चौकी प्रभारी प्रशान्त श्रीवास्तव से ग्रुप एडमिन की मुलाकात भी हुई थी और इस मामले की जांच भी चौकी प्रभारी को ही सौंपी गई है। इसके बाद भी पता नहीं चौकी प्रभारी ग्रुप एडमिन से कोई पूछतांछ क्यों नहीं कर पा रहे हैं। पुलिस की इस कार्यशैली से नगर के पत्रकारों में काफी रोष है। यह कड़वा सच है कि यदि पत्रकार की जगह किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के लिए इस तरह की पोस्ट की गई होती तो अब तक मुकदमा दर्ज होकर ग्रुप एडमिन से पूछतांछ भी पूरी हो गई होती और पोस्ट करने वाले का पता भी लगा लिया गया होता है। यदि पोस्ट करने वाले का पता नहीं लगा होता तो ग्रुप एडमिन के ही खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका होता।






