तेहि अवसर सुनि शिव धनुभंगा, आयेउ रघुकुल कमल पतंगा
तेहि अवसर सुनि शिव धनुभंगा, आयेउ रघुकुल कमल पतंगा

तेहि अवसर सुनि शिव धनुभंगा, आयेउ रघुकुल कमल पतंगा

गोला गोकर्णनाथ खीरी। छोटी काशी के निकटवर्ती गांव विजौरिया में चल रही राम कथा के पांचवे दिन कथा व्यास सुनील मिश्र ने धनुष भंग की सुन्दर कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम जी ने जनकपुरी में शिवजी का पिनाक धनुष तोड़ा तब धनुष के टूटने की ध्वनि सुनकर परशुराम जी वहां जा पहुंचे। परशुराम जी ने बहुत क्रोध करते हुए धनुष तोड़ने वाले को प्रांणदण्ड देने का ऐलान कर दिया। उनके क्रोध को देखकर जनकनन्दिनी के स्वयंवर में पहुंचे सभी राजा डर गए। उनका क्रोध देखकर लक्ष्मण जी ने उनका विरोध करना प्रारम्भ कर दिया। अंत में श्रीराम ने लक्ष्मण को समझाया और परशुराम को अपने सूक्ष्म रूप के दर्शन काराये। परशुराम जी को जब ज्ञात हुआ कि यह कोई साधारण मनुष्य नहीं बल्कि अवतारी हैं। तब वह श्रीराम की जय जयकार करते हुए परशुराम वन को चले गए। सुन्दर कथा सुनकर श्रोता भावविभोर हो गये। कथा समापन पर आरती के साथ प्रसाद का वितरण किया गया।








