चीनी मिलों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण से छुटकारा दिलाए जाने की मांग
- अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद एवं अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा

चीनी मिलों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण से छुटकारा दिलाए जाने की मांग
– अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद एवं अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा

(निर्जेश मिश्र ‘‘सम्पादक’’)
लखीमपुर-खीरी। जिले की तहसील पलियाकलां, गोला गोकर्णनाथ, खंभारखेड़ा, ऐरा खमरिया, गुलरिया, संपूर्णानगर एवं बेलरायां आदि चीनी मिलों द्वारा बड़े पैमाने पर फैलाए जा रहे प्रदूषण की वजह से जनता को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण के कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियां पांव पसार रहीं हैं। इसके बाद भी शासन-प्रशासन जनता की इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इस सम्बन्ध में अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है।
ज्ञापन में कहा गया है चीनी मिलों का संचालन जल्द ही प्रारंभ होने वाला है। एक बार फिर हम सभी लोग चीनी मिलों द्वारा बड़े पैमाने पर फैलाए वाले प्रदूषण का शिकार होने वाले हैं। पलिया की बजाज हिन्दुस्थान चीनी मिल से प्रदूषित पानी (जो कि पलिया खुर्द के नाले में आता है) से पलिया खुर्द, बेहननपुरवा, पट्टी पतवारा, बड़ागांव, बड़ा पतवारा, धोबिनपुरवा, मरुआपश्चिम, छोटा सरखना, बड़ा सरखना, बिजोरिया, धूसर, नौगवां, मझग़ई, छोटी बल्लीपुर, बड़ी बल्लीपुर, बबौरा, विष्णुपुर, चौरी, खालेपुरवा, कुंवरपुरकलां, दुबहा, रामपुर, मुर्गहा, गदियाना, पतिया, टापर, त्रिलोकपुर, लोकनपुरवा, मलंगा, शंकरपुरवा, वनघुसरी, लुधौरी एवं छब्बापुरवा सहित दर्जनों गांवों के लोगों के घरों आदि स्थानों पर लगे नलों के पानी में आर्सेनिक नामक जहर समाहित हो गया है। ग्राीमणों को आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे लोगों को नेत्र रोग, डायरिया और सांस संबंधी फेफड़ों जैसी अनेकों गंभीर बीमारियों का शिकार होना पड़ता है। लोगों के बर्तनों और कपड़ों का रंग काला/पीला पड़ जाता है। चीनी मिलों की चिमनी से राख उड़कर कई-कई किलोमीटर दूर तक जाती है। जिस कारण लोगों के घरों पर सूखने के लिए डाले गए कपड़े बदरंग हो जाते हैं। इसके अलावा नागरिकों (खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों) को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके विरुद्ध मांग करने पर उपरोक्त चीनी मिलों द्वारा एकाध दिनों के लिए चिमनी में फिल्टर लगा कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है। दो-चार दिनों के बाद वह फिल्टर भी निकाल दिया जाता है। इसी प्रकार संपूर्णानगर चीनी मिल द्वारा प्रदूषित पानी सोतिया नाले में छोड़ा जाता है, जो कि शारदा नदी में जाकर मिलता है। जिसका खामियाजा संपूर्णानगर से लेकर पलिया और उसके आगे लुधौरी गांव तक के ग्रामीणों व पशुओं को उठाना पड़ता है। सरकार द्वारा बनाए गए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इन चीनी मिलांे के विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही नहीं करते अथवा ठोस कदम नहीं उठाते हैं। बता दें कि लखीमपुर जिला गन्ना प्रधान क्षेत्र है, जिस कारण जिले में बड़ी-बड़ी चीनी मिलें स्थापित हैं। इनमें से अधिकांश चीनी मिलें सरकार द्वारा बनाए गए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों व उनके मानकों का पालन बिल्कुल भी नहीं करती हैं। सरकारी तंत्र तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी चीनी मिल मालिकानों व उसके प्रबंध तंत्र की मिठास के चलते अनदेखी करता है, जिसका खामियाजा इन चीनी मिलों की सीमा में आने वाले सैकड़ों गांवों के ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। इसके अलावा इसका प्रभाव वहां की जलवायु एवं वहां के लाखों पशुओं व जलीय जीव-जंतुओं आदि पर पड़ रहा है। इस संदर्भ में पलिया नगर की रामलीला कमेटी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा सही तथ्यात्मक जांच आख्या न प्रस्तुत करते हुए सरकार, कोर्ट एवं संबंधित उच्चाधिकारियों को गलत रिपोर्ट भेजकर गुमराह किया जाता है। व्यापक जनहित में किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराकर चीनी मिलों द्वारा बड़े पैमाने पर फैलाए जा रहे वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण से निजात दिलाए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन देने वालों में अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय सचिव एड. अमित महाजन, एड. संजय राठौर, अभय श्रीवास्तव, सौम्या भारती एवं विदेश कुमार यादव आदि मौजूद रहे।





