तीन दशकों से किराए के भवन में चल रहा आयुर्वेदिक अस्पताल
- दम तोडती जडौरा में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा समुचित इलाज

तीन दशकों से किराए के भवन में चल रहा आयुर्वेदिक अस्पताल
– दम तोडती जडौरा में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा समुचित इलाज

गोलागोकर्णनाथ-खीरी। प्रदेश सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। इसके बाद भी सरकार की यह मंशा सफल होती नहीं दिखाई दे रही है। जड़ौरा स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में पिछले तीन महीनों से दवाइयां नहीं हैं। जिस कारण मरीजों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बदलते मौसम के चलते यहां प्रतिदिन 40 से 50 की संख्या में मरीज अपना इलाज कराने के लिए आते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा का हाल काफी बुरा है। आयुर्वेदिक चिकित्सालय कहीं किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं तो कहीं सरकारी भवनों के मात्र एक कमरे में ही चिकित्सा के सारे कार्य हो रहे हैं। इन अस्पतालों में दवाइयां का बड़ा अभाव है। इसी कारण डॉक्टर मरीज तो दखते हैं, परन्तु उन्हें दवाईयां बाहर की लिखनी पड़ती हैं। तहसील क्षेत्र के ग्राम जड़ौरा में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र बीते लगभग 30 वर्षों से किराए के भवन में ही चल रहा है। यह भवन भी काफी जर्जर हो चुका है। बरसात होने पर दवाइयां भीगकर खराब हो जाती हैं। अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट डॉक्टर अजीत सिंह ने बताया कि वह कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि यहां कर्मचारियों का अभाव है। यहां कम से कम चार कर्मचारी होने चाहिए। मुख्य रूप से एक डॉक्टर व एक सफाई कर्मचारी की तैनाती होना चाहिए, जो लंबे अरसे से नहीं है। सफाई कर्मचारी न होने के कारण अस्पताल की साफ-सफाई भी नहीं हो पाती है। बताया कि उनके पास दो अस्पतालों का चार्ज है। सोमवार, मंगलवार व बुधवार को जरौरा व बुधवार, गुरूवार व शुक्रवार को निकटवर्ती स्वास्थ्य केंद्र भीखमपुर में अस्पताल में बैठते हैं। एक डॉक्टर को दो जगह की जिम्मेदारी संभाल पाना संभव नहीं है। आयुर्वेदिक अस्पतालों से लोगों का विश्वास उठता चला जा रहा है। पर्याप्त दवाइयां न होने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जनता झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करने को विवश हो रही है। सरकार की इस मंसा पर सम्बन्धित अधिकारी पलीता लगाने का कार्य कर रहे हैं।






