पलिया में आने वाली बाढ़ का आखिर कौन है जिम्मेदार
बाढ़ में फंसी तीन बच्चियों को बचाने की गुहार लगाई तो पलिया कोतवाल ने दिया कुछ इस तरह का जवाब

पलिया में आने वाली बाढ़ का आखिर कौन है जिम्मेदार
बाढ़ में फंसी तीन बच्चियों को बचाने की गुहार लगाई तो पलिया कोतवाल ने दिया कुछ इस तरह का जवाब

(निर्जेश मिश्र “सम्पादक”)
सावधान इण्डिया न्यूज, पलियाकलां-खीरी। कौन हैं पलिया की बाढ़ के असली गुनहगार, पुँछते हैं बाढ़ग्रस्त नागरिक भीषण बरसात के बाद बाँध से निरन्तर छोंडे जा रहे पानी से बढ़े शारदा नदी के जलस्तर से जहाँ अतरिया के निकट रेलवे लाइन कट गयी और बाढ़ का पानी नेशनल हाइवे पार करता हुआ हजारों लोगों के लिये काल बनकर बहने लगा। बाढ़ के पानी से आस पड़ोस के गाँवों के साथ साथ पलिया कस्बे के मोहल्ला ढाँखिन, इंद्रानगर, सुभाषनगर में जल प्लावित मकानों में फंसे निर्दोष नागरिकों को पुलिस व प्रशासन के कड़े परिश्रम के बाद सकुशल सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। बाढ़ के नाकाफी इंतजामों के बावजूद सुरक्षा एवं व्यवस्था में लगे अधिकारियों ने दिन रात एक करते हुये आपदाग्रस्त लोगों को यथा सम्भव राहत पहुंचाने का प्रबन्ध किया। बाढ़ राहत के तमाम सरकारी इंतजामों से बेखबर आम जनमानस के मन मे एक साधारण सा प्रश्न मंथन कर रहा है कि महीनों पहले से प्राकृतिक आपदा पर मॉकड्रिल कर रहे प्रशासन को आखिर शारदा नदी के तट पर अरसे से मड्ड पम्पों व जेसीबी से खनन कर रही मशीनें व परिवहन विभाग के नियमों की धज्जियाँ उड़ाते दर्जनों डम्फर और कृषि कार्य हेतु अनुमोदित सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रॉलियां क्यों नहीं दिखीं ? पिछले एक साल से जब खनन माफिया अपने सिंडिकेट के साथ शारदा नदी के पलिया क्षेत्र की ओर श्रीनगर, आजाद नगर, नगला आदि ग्रामों से लगे नदी के तटों पर दो दो मड्ड पम्प लगाकर अवैध रेत खनन करते हुये गहरी गहरी खदानें बना रहा, तो पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी आखिर क्यों मौन रहे ? नेशनल हाइवे के निकट अवैध खनन कर लगाये गये लाखों घन मी0 अवैध डम्प पर आखिर क्यों मौन रहे अधिकारी ? कौन हैं जिनके संरक्षण में खनन माफिया के अवैध खनन व्यापार को नजरअंदाज कर क्षेत्रीय जनता को डूब मरने की कगार पर लाकर छोंड दिया गया ? अतरिया क्रासिंग पर हो रहे कटान को रोंकने के इंतजामात में लगे कर्मठ अधिकारियों को नजदीक ही लगे अवैध खनन के डम्प आखिर क्यों नहीं दिख रहे ? आखिर वह कौन सा चश्मा है जिसको लगाने के बाद जिम्मेदारों को बाढ़ तो दिख रही है, लेकिन बाढ़ लाने के कारण और कारक आखिर कैसे नहीं दिख रहे ? बाढ़ से होने वाले जान माल के नुकसान पर आखिर किसके खिलाफ विधिक कार्यवाही की जायेगी ? बाढ़ की विभीषिका से बिलबिलाते निर्दोष नागरिकों के असली गुनहगार खनन माफिया, खनन अधिकारी या कोई अन्य जिम्मेदार हैं ? और बाढ़ की विभीषिका के जिम्मेदारों पर आखिर क्या कार्यवाही की जायेगी ? और कौन करेगा इनपर कार्यवाही ? क्या आम जनमानस के सवालों का कोई तथ्यात्मक जबाब शासन, प्रशासन या राजनेता के पास है ? अगर है तो बतायें, पूँछती है क्षेत्रीय जनता। इसी क्रम में पलिया नगर के मोहल्ला ढाकिन के एक परिवार की तीन बच्चियां बाढ़ में फंसी हुई हैं। बाढ़ पीड़ित मुमताज ने नगर के कमल चौराहे पर पुलिस फोर्स के साथ मौजूद पलिया प्रभारी निरीक्षक विवेक कुमार उपाध्याय को अपनी समस्या सुनाई तो उन्होंने क्या कहा, जरा सुनिए। सुना आपने कोतवाल साहब कह रहे हैं कि बच्चियों को कंधे पर बिठाकर लाइए। उधर जब समस्या बताने के लिए पलिया एसडीएम को फोन किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं रिसीव किया। यह कोई नयी बात नहीं हैं, क्योंकि पलिया एसडीएम का फोन इससे पहले भी कभी रिसीव नहीं हुआ। अन्त में पलिया सीओ यादवेन्द्र यादव को पूरे मामले से अवगत कराया गया। हालांकि बच्चियों को बचाने का कोई हल नहीं निकल सका, लेकिन कम से कम उन्होंने आश्वासन तो दिया और तरीका भी बताया। परन्तु जिस समय कोतवाल को अवगत कराया गया था, उस समय यदि प्रयास किया जाता तो तीनों बच्चियों को आसानी से बाहर निकाला जा सकता था। जबकि मुख्यमंत्री का आदेश है कि यदि किसी के दरवाजे पर बाढ़ का पानी पहुंचता है तो उस परिवार को सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना स्थानीय प्रशासन का दायित्व है। लेकिन पलिया का प्राशासन मुख्यमंत्री के आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहा है। जिस कारण अभी भी तीनों बच्चियां बाढ़ में फंसी हुई हैं। पीड़ित ने गोल्डन फ्लावर स्कूल के चेयरमैन जसमेल सिंह मांगट से बात करके अपनी समस्या बताई तो उन्होंने अपना ट्रैक्टर भेजकर बच्चियों को बाहर निकालने का आश्वासन दिया है। हालांकि ट्रैक्टर से भी बच्चियों को रेस्क्यू नहीं किया जा सका। चीनी गेट नम्बर दो से ट्रैक्टर वापस आ गया।





