चले राम लक्षमन मुनि संगा, गए जहां जग पावनि गंगा
मानसकथा के चौथे दिन कथा व्यास शिव प्रकाश मिश्र ने सुनाई गंगा अवतरण की महिमा

चले राम लक्षमन मुनि संगा, गए जहां जग पावनि गंगा
– मानसकथा के चौथे दिन कथा व्यास शिव प्रकाश मिश्र ने सुनाई गंगा अवतरण की महिमा

गोलागोकर्णनाथ-खीरी। कथा व्यास ने बताया कि विस्वामित्र कहते हैं राम तुम्हारे वंश मे एक सगर महराज हुए हैं, जिनके साठ हजार एक पुत्र हुए। सगर ने एक बार अश्वमेध यज्ञ किया और यज्ञ का घोड़ा पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा था। तभी इंद्र को आशंका हुई कि यदि यह यज्ञ पूरा हो जाएगा, तो निश्चित रूप से हमारा इंद्राशन चला जायेगा। इंद्र ने यज्ञ का घोड़ा ही चोरी कर लिया और कपिल मुनि के आश्रम में ले जाकर बांध दिया।
आगे उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि सगर के पुत्रों को जब यज्ञ का घोड़ा नहीं मिला तो उसे ढूंढते-ढूंढते कपिल मुनि के आश्रम पर पहुंचे, जहां उन्होंने घोड़ा बंधा हुआ देख कपिल मुनि को ही चोर समझकर उन्हें बुराभला कहने। उसी बीच किसी ने कपिल मुनि पर लात से प्रहार कर दिया, जिससे उन्हें बड़ा क्रोध आ गया। उन्होंने सभी को अपने तेज से भस्म कर दिया। सगर को यह पता चला तो यह दुख सह नहीं सके और संसार छोड़ दिया। सगर के बाद असमंजस राजा हुए। असमंजस के बाद अंशुमान और उनके बाद दिलीप। दिलीप के बाद भागीरथ और भगीरथ की तपस्या से गंगा मैया मृत्युलोक में आईं। सुन्दर व्याख्यान सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। कथा के अन्त में आरती के साथ प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान कथा में सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।








