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यह जीवन बीहड़ बंजर है, तुम मौसम की बहार…

पूरनपुर में हिट रहा टॉप फाउंडेशन का पहला कवयित्री सम्मेलन

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यह जीवन बीहड़ बंजर है, तुम मौसम की बहार…

– पूरनपुर में हिट रहा टॉप फाउंडेशन का पहला कवयित्री सम्मेलन


(निर्जेश मिश्र “सम्पादक”)
सावधान इण्डिया न्यूज, पूरनपुर (पीलीभीत)। टॉप फाउंडेशन के तत्वाधान में नगर में आयोजित जनपद का पहला कवयित्री सम्मेलन पूरी तरह सफल रहा। तय समय में कवियत्रियों ने सधा हुआ एवं संतुलित काव्य पाठ करके श्रोताओं का दिल जीत लिया। सभी श्रोता वाह-वाह करते नजर आए।
मधुबन होटल की छत पर सजी कविता की मोहक महफिल में कार्यक्रम का शुभारंभ आयोजक गिरिजा शर्मा की वाणी वंदना से हुआ। उन्होंने पढ़ा-
आदि नहीं अंत नहीं, पार नहीं सीमा नहीं, ऐसे पारावर में समाई आदि शक्ति हो।
संयोजक व संचालक की संयुक्त भूमिका निभा रहीं डाक्टर नीरांजना शर्मा ने फरमाया-


मैं कर्म का विश्वास हूं आशा नहीं बस जीत की।
मैं भ्रामरी का गीत हूं लिप्सा नहीं मनमीत की।
सुगंध अग्रवाल की रचना कुछ इस प्रकार से श्रोताओं के कानों में गूंजी-


मैं बेटी हूं तुम्हारी मां, सदा पूजा करूं तेरी,
वतन के वास्ते जीती हूं, इस पर जां फिदा मेरी।
जो द्रोही देश का बनकर नजर इस पर बुरी डालें,
मैं लक्ष्मीबाई बन गरजूं, बचाने आबरु तेरी।
इन लाइनों को सुनते ही समूचा सदन तालियों से गूंज उठा।

कवयित्री सुषमा आर्या ने पढ़-

यह जीवन बीहड़-बंजर है, तुम मौसम की बहार बनो।
देख लिया है जीत के मैंने, अब तुम मेरी हार बनो॥
इन लाइनों के माध्यम से सुषमा आर्या ने लोगों के दिलों में जगह बना ली। श्रोताओं ने करतलधवनि के साथ उनका जोरदार अभिनन्दन किया।


लखनऊ से पधारीं स्वाति मिश्रा ने-
बेटियों बिन वंश कब आगे को बढ़ता है।
बेटियां ही सृष्टि का आधार होती हैं।।
सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं।


इनवर्टिस विवि की प्रोफेसर डाक्टर निष्ठा श्रीवास्तव ने पढ़ा-
एकांक है हर युवा, जिम्मेदार कौन है। हर एकांकता का, यह सूत्रधार कौन है।।


डाक्टर नीता अग्रवाल की रचना-
मन हृदय में रमा राम का नाम है।
राम का नाम भव मुक्ति का धाम है।
की काफी सराही गई।


कार्यक्रम अध्यक्ष संगीता सिंघल ने पढ़ा-
फरिश्तों ने किया, लेकिन ये अंदाज गुलामी है।
सन सैतालिस से बही, हवाएं बेजुबानी है।
वतन के नाम पर बेचा, चमन सोने की चिड़िया सा।
ये तेरी है ना मेरी है, कहानी हिंदुस्तानी है।।
सुंदर स्वर की मलिका गीता राठौर ने गाया-
गीत गाती गुनगुनाती, सप्त स्वरों सी जिंदगी।
कभी तार सप्तक पे जाती, कभी मंद्र पर ज़िंदगी।।
संजीता सिंह ने सुनाया-
साहस हो संस्कार ना छूटें, भारतीयता की पहचान न छूटे।
सबको रंगना अपने रंग में, पर भगवा रंग का मान ना टूटे।।
नवांकुर रमा वर्मा ने कुछ इस अंदाज में सभी का स्वागत किया-
स्वागत है अतिथियों का, श्रोताओं का स्वागत है।
मिला जो साथ कवयित्रियों का, उनका भी स्वागत है।
इसके अतिरिक्त शायरा सुलतान जहां और सरोज सरगम ने भी मनमोहक काव्य पाठ किया। अतिथियों के सम्मान व ब्रम्हकुमारी रीमा बहन के संदेश से कार्यक्रम पूर्ण हुआ।

टॉप फाउंडेशन के संस्थापक/अध्यक्ष/पत्रकार सतीश मिश्र “अचूक” ने सभी का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में पहुंचे जनपद के प्रमुख कवियों संजय पांडे गौहर, पंडित राम अवतार शर्मा, अविनाश चंद्र मिश्र, उमेश अद्भुत, अमिताभ मिश्र, देवशर्मा विचित्र, डाक्टर यूआर मीत, राजेश राठौर व विकास आर्य ने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर दलजीत कौर की कविता पर भी तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। सम्मेलन में पहुंचे स्थानीय विधायक बाबूराम पासवान ने भी कवयित्रियों का हौसला बढ़ाया। उनकी धर्मपत्नी रामबेटी पासवान, ब्रह्माकुमारी रीमा बहन और जिले की प्रथम नागरिक डॉ दलजीत कौर ने सभी कवयत्रियों को सम्मानित किया। वरिष्ठ कवि संजय पांडेय गौहर की तरफ से मंचीय मातृशक्तियों को तंदुल और संयोजक डाक्टर नीरांजना शर्मा ने नव वर्ष की डायरी व पेन भेंट किए। इस दौरान सम्मेलन में काफी संख्या में महिला/पुरुष श्रोता मौजूद रहे। सभी ने मुक्तकंठ से इस अनूठे आयोजन की प्रशंसा की।


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