सरकारी अनुदान की जमीन से लगभग दो दर्जन से अधिक गरीब किसानों की चल रही रोजीरोटी
- एक किसान को भूमि जोतने से रोके जाने से भुखमरी की कगार पर पहुंचा गरीब किसान का परिवार

सरकारी अनुदान की जमीन से लगभग दो दर्जन से अधिक गरीब किसानों की चल रही रोजीरोटी
– एक किसान को भूमि जोतने से रोके जाने से भुखमरी की कगार पर पहुंचा गरीब किसान का परिवार

(निर्जेश मिश्र ‘‘सम्पादक’’)
पलियाकलां-खीरी। तहसील क्षेत्र की ग्रमसभा चंदनचौकी में लगभग दो दर्जन से अधिक किसान सरकारी अनुदान की भूमि पर लम्बे अरसे से खेती करके अपना व अपने परिवारों का भरण-पोषण करते चले आ रहे हैं। लगभग एक साल से एक किसान को जमीन जोते जाने से रोक दिया गया। जिस कारण किसान काफी परेशान है और छोटे से लेकर बडे से बड़े अधिकारियों तक से गुहार लगा चुका है, लेकिन उसे कहीं भी न्याय नहीं मिल सका, जबकि वाकी के सभी किसान उसी जमीन को जोतते चले आ रहे हैं।
बता दें कि चंदनचौकी ग्रामसभा के अन्तर्गत सैकड़ों एक भूमि पर दो दर्जन से अधिक किसान सदियों से खेती करते चले आ रहे हैं। यह जमीन जब वर्ग 4 के अन्तर्गत थी, तब सभी किसानों के इंतखाब निकलते थे, जिनमें उक्त जमीनें किसानों के नाज दर्ज थी। वर्ष 2005 में चकबन्दी खत्म होने के बाद से यह भूमि नवीन परती में दर्ज हो गई थी। उसके बाद भी सभी किसान पूर्ववत् अपने-अपने हिस्से की जमीन पर खेती करते चले आ रहे हैं। उन्हीं में से एक गरीब किसान है, जिसका नाम है कन्नावाज पुत्र तुर्रमवाज। कन्नावाज के नाम 3 एकड़ 67 डिस्मिल जमीन दर्ज थी। 2005 के बाद से वह भी अपनी जमीन को पूर्व की भांति जोत रहा था। एक साल पूर्व कन्नावाज को उक्त जमीन से बेदखल कर दिया गया था। पीड़ित ने उपजिलाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक को प्रार्थना पत्र देकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिल सका। पीड़ित का कहना है कि ग्राम प्रधान मुकेश बंसल उससे चुनावी रंजिश मानते हैं। जिस कारण ग्राम प्रधान ने ही उसे जमीन से बेदखल कराया है। उसने यह भी बताया कि जब वह ग्राम प्रधान के पास फरियाद लेकर जाता है तो ग्राम प्रधान कहते हैं कि तुम्हारी कहीं कोई अधिकारी नहीं सुनेगा और न ही तुमको जमीन जोतने दी जाएगी। कुल मिलाकर किसान कन्नावाज के पास उसके परिवार का भरण-पोषण करने के लिए यही जमीन एकमात्र सहारा थी, जो कि उससे छीन ली गई है। जमीन छिन जाने से पीड़ित किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है।

जब सारे खातेदार काबिज हैं तो एक को आखिर क्यों किया गया बेदखल
चंदनचौकी ग्रामसभा में नवीन परती की भूमि पर जब पचासों किसान काबिज हैं और उस पर खेती कर रहे हैं तो आखिरकार एक किसान को ही क्यों बेदखल कर दिया गया। जब एक का कब्जा अवैध है तो अन्य किसानों का कब्जा वैध कैसे हो गया और कैसे जोत रहे हैं वह सब नवीन परती की जमीन ? किसान कन्नावाज कहना है कि वह उच्चाधिकारियों से यह निवेदन करता है कि उसे उसकी जमीन जोतने दी जाए, जिससे उसके परिवार की रोजीरोटी चल सके। यदि नहीं जोतने की जा रही है तो वाकी के किसानों से भी जमीन कब्जामुक्त कराई जाए।


पांच खातेदारों के नाम नवीन परती भूमि पर एसबीआई ने कर दिया लोन
चंदनचौकी में नवीन परती भूमि पर कब्जा किए पांच खातेदारों के नाम भारतीय स्टेट बैंक ने लोन भी कर दिया है। सबसे मजेदार बात यह है कि जब नवीन परती भूमि पर बैंक से लोन नहीं हो सकता तो आखिरकार इन पांच खातेदारों के नाम लोन कैसे हो गया और कैसे निकल आया इन पांच खातेदारों के नाम इंतखाब ? इस मामले की यदि निष्पक्षता से जांच कराई जाए तो बैंक से लेकर लेखपाल और तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों तक की भ्रष्ट कार्यप्रणाली उजागर हो जाएगी।





