दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर जंगल में तेजी से सक्रिय हो रहे लकड़कट्टे
विभागीय उच्चाधिकारियों की लापरवाही के कारण लकड़कट्टों पर नहीं कस पा रहा शिकंजा

दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर जंगल में तेजी से सक्रिय हो रहे लकड़कट्टे
– विभागीय उच्चाधिकारियों की लापरवाही के कारण लकड़कट्टों पर नहीं कस पा रहा शिकंजा
– जंगल की हरियाली का समूल नष्ट करने पर तुले जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारी

(निर्जेश मिश्र “सम्पादक”)
सावधान इण्डिया न्यूज, लखनऊ । दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर रेंज में इस समय लकड़कट्टे बड़ी तेजी से सक्रिय हो रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी एवं वन्यजीव प्रतिपालक की लापरवाही के कारण लकड़कट्टों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बीते कुछ माह पूर्व एक किसान को जंगल की बेशकीमती लकड़ी बिक्री की गयी थी, जिसकी यदि जांच कराई जाए तो सारी असलियत सामने आ जाएगी। बता दें कि एक ओर जहां वन विभाग “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ”, वृक्ष धरा का भूषण हैं, करते दूर प्रदूषण हैं”, जैसे स्लोगनों से लिखी पट्टिकाएँ लगवाता है। वहीं दूसरी ओर वही विभाग धरा के भूषण का समूल नष्ट करने पर तुले हुए हैं। इस समय सुल्तानपुर पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लकड़कट्टे जंगल में प्रवेश करते हैं। बताया जा रहा है कि प्रति लकड़कट्टे से सौ रुपये का सुविधा शुल्क लिया जाता है। अभी हाल ही में किशनपुर रेंज में रामपाल नाम का एक व्यक्ति पकड़ा गया था, जिसके पास से एक बोरी धरती के फूल बरामद हुए थे। इसके बाद भी उस व्यक्ति को छोड़ दिया गया था। सूत्रों का यह भी कहना है कि उक्त रामपाल किशनपुर के जंगल से लकड़ी का मोटा धंधा करता है। इसके बाद भी विभागीय अधीकारी पता नहीं क्यों उस पर मेहरबानी बनाए हुए हैं। यदि समय रहते लकड़कट्टों पर शिकंजा नहीं कसा गया तो वह दिन भी दूर नहीं जब जंगल की हरियाली सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी। वन विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते जंगल से तेजी से बेशकीमती लकड़ी काटकर लाई जा रही है। विभागीय लापरवाही के कारण जंगलों में सक्रिय लकड़ी माफिया वन सम्पदा को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। विभागीय उच्चाधिकारियों को यह मामला गम्भीरता से लेते हुए वर्तमान में तैनात अधिकारी एवं कर्मचारियों की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि जंगल में लकड़कट्टों का प्रवेश न हो सके और वन सम्पदा सुरक्षित रह सके।





