लेवर इंस्पेक्टर की लापरवाही के कारण पलिया व भीरा में सफल नहीं हो पा रही है साप्ताहिक बन्दी
लेवर इंस्पेक्टर की लापरवाही के कारण पलिया व भीरा में सफल नहीं हो पा रही है साप्ताहिक बन्दी

लेवर इंस्पेक्टर की लापरवाही के कारण पलिया व भीरा में सफल नहीं हो पा रही है साप्ताहिक बन्दी
(निर्जेश मिश्र)

लखीमपुर/पलियाकलां-खीरी। लेवर इंस्पेक्टर की लापरवाही के कारण पलिया एवं भीरा में साप्ताहिक बन्दी सफल नहीं हो पा रही है। यदि साप्ताहिक बन्दी के दिन लेवर इंस्पेक्टर मार्केट में भ्रमण कर सभी दुकानों का निरीक्षण करें तो निश्चित रूप से साप्ताहिक बन्दी को सफल बनाया जा सकता है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन भी साप्ताहिक बन्दी के दिन कोई कार्रवाई नहीं करता है। जिस कारण व्यापारी अपनी मनमानी के अनुसार ही काम कर रहे हैं।
बता दें कि पलिया और भीरा में रविवार को साप्ताहिक बन्दी रहती है। जिलाधिकारी के आदेशानुसार साप्ताहिक बन्दी के दिन सभी व्यापारी अपनी-अपनी दुकानें बन्द रखेंगे। परन्तु पलिया और भीरा में जिलाधिकारी के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। बीते रविवार को भीरा में तमाम दुकानें खुली पाई गई थीं। कुछ व्यापारियों से वार्ता भी की गई थी। साप्ताहिक बन्दी के दिन यदि कुछ दुकानें खुली और कुछ बन्द रहती हैं तो इसका असर दुकानें बन्द रखने वाले व्यापारियों पर अधिक पड़ता है, उनका ग्राहक टूट जाता है। इस वजह से बन्दी का पालन करने वाले व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है। बन्दी के दिन मार्केट भ्रमण के दौरान ज्ञात हुआ कि दूध-दही, खाद और होटल एवं ढावा खुले रहेंगे, जबकि यह आदेश भी देखा जाए तो गलत ही है। क्योंकि साप्ताहिक बन्दी केवल और केवल लेवरों की सहूलियतों को दृष्टिगत रखते हुए लागू की गई है, जबकि सबसे अधिक लेवर होटलों, ढाबों और खाद की दुकानों पर ही देखने को मिलती है। तो फिर होटलों, ढाबों और खाद की दुकानों पर साप्ताहिक बन्दी का आदेश क्यों नहीं लागू किया गया ? शासन के कुछ आदेश ऐसे होते हैं जो जनता के गले नहीं उतरते। खैर जो भी आदेश जारी किए गए हैं, उनका पालन कराना स्थानीय प्रशासन और लेवर इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी है। इसके बाद भी स्थानीय प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पलिया उपजिलाधिकारी से इस सम्बन्ध में वार्ता की गई तो उन्होंने साप्ताहिक बन्दी को सफल बनाने में पूरी-पूरी असमर्थता जताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। व्यपारियों का आरोप है कि भीरा नगर पंचायत में साप्ताहिक बंदी के नाम पर भीरा पुलिस भेदभाव कर रही है। लखीमपुर मार्ग पर अखिर किसके निर्देश पर दुकानें खुल रहीं हैं ? नगर में दूध बेंचने के नाम पर 11ः00 बजे तक शटर उठाकर परचून का सामान बिक्री किया जाता है। क्या बंदी के नियम में ये नहीं आते ? या फिर भीरा पुलिस केवल किराना व्यापारियों का ही शोषण करने के लिये प्रसिद्ध है ? कुछ मार्केट के व्यापारियों ने नाम न खुलासा करने की शर्त पर बताया कि अगर नियम सब पर लागू नहीं हुआ तो वह लोग भीरा थानाध्यक्ष व उपनिरीक्षकों के खिलाफ सीएम एवं डीएम से शिकायत करेंगे। व्यापारियों का आरोप है कि भीरा पुलिस सपा नेताओं के इशारे पर केवल मेन मार्केट की दुकानें बंद करवाती है। अखिर जो दुकानें सुबह 06ः00 बजे से खुलती हैं, उनसे क्या पुलिस प्रशासन का कमीशन बंधा हुआ है जो वह दुकानदार डीएम द्वारा जारी आदेशों का पालन नहीं करते। अब बात आती है लेवर इंस्पेक्टर की, तो वह भी बन्दी के दिन कभी नजर नहीं आते, जबकि इस आदेश का पालन कराने में मुख्य भूमिका लेवर इंस्पेक्टर की ही है। बात पलिया और भीरा की ही नहीं, बल्कि पूरे जिले की है। पूरे जिले में कहीं भी साप्ताहिक बन्दी का पालन नहीं किया जाता है। हां एक जगह ऐसी है, जहां बन्दी का पालन पूर्ण रूप से किया जाता है। वह है पलिया तहसील का सम्पूर्णानगर बाजार। सम्पूर्णानगर बाजार में एक माह में दो बार बन्दी सुनिश्चित की गई है। पहली 15 और दूसरी 30 तारीख को। इन दोनों तारीखों में मार्केट पूरी तरह से बन्द रहती है। जहां व्यापारी एकता देखने को मिलती है। वाकी पूरे जिले में साप्ताहिक बन्दी का पालन नहीं किया जा रहा है। साप्ताहिक बन्दी के दिन लेवर इंस्पेक्टर को मार्केट का भ्रमण करना चाहिए। जो भी दुकानें खुली पाई जाएं तो सम्बन्धित व्यापारी के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।






