जिले में 1471 बच्चों को मिल रहा सीएम बाल सेवा योजना का लाभ
- योजना के तहत मिल रहा ढाई हजार रूपये प्रति माह, 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई में भी की जाएगी मदद

जिले में 1471 बच्चों को मिल रहा सीएम बाल सेवा योजना का लाभ
– योजना के तहत मिल रहा ढाई हजार रूपये प्रति माह, 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई में भी की जाएगी मदद
लखीमपुर-खीरी। 01 मार्च 2020 के बाद माता-पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों के जीवनयापन हेतु प्रदेश सरकार सहारा बनी। एक से 18 वर्ष तक के बच्चों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश का निवासी होना जरूरी है। एक परिवार के अधिकतम दो बच्चों को योजना का लाभ मिलेगा। जिले में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत जिले के 1471 बच्चों को लाभ मिल रहा है। इस योजना के तहत बच्चों को हर माह 2500 रुपए की धनराशि दी जाती है।
डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) से लाभान्वित किये जाने वाले बच्चों की श्रेणियां/पात्रता की जानकारी देते हुए बताया कि गैर संस्थागत श्रेणी के अंतर्गत एक से 18 वर्ष तक की आयु के ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता दोनों, किसी में से एक की मृत्यु 01 मार्च 2020 के बाद हुई है। 18 से 23 वर्ष तक की आयु के ऐसे किशोर जिनके माता-पिता दोनों या किसी में सेएक की मृत्यु हो गयी है। उनको कक्षा 12 तक शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त राजकीय महाविद्यालय, विश्वविद्यालय अथवा तकनीकी संस्थान से स्नातक डिग्री अथवा डिप्लोमा प्राप्त करने वाले एवं छम्म्ज्, श्रम्म्, ब्स्।ज् जैसे राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षायें उत्तीर्ण करने वाले मेधावी छात्रों को 23 वर्ष की आयु पूरी होने या स्नातक शिक्षा अथवा मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थान से डिप्लोमा प्राप्त करने में जो भी पहले हो तक इस योजना के अन्तर्गत लाभान्वित किया जायेगा। केन्द्र अथवा राज्य सरकार द्वारा संचालित किसी अन्य समरूपी योजना या बाल श्रमिक विद्या योजना आदि का लाभ प्राप्त कर रहे परिवारों को उक्त योजना का लाभ नहीं दिया जा सकेगा। परन्तु मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रहे ऐसे बच्चे को, जो 18 वर्ष की आयु पूरी करने के उपरान्त कक्षा 12 तक शिक्षा पूर्ण करने के बाद भी राजकीय महाविद्यालय, विश्वविद्यालय अथवा तकनीकी संस्थान से स्नातक डिग्री अथवा डिप्लोमा प्राप्त करने एवं छम्म्ज्, श्रम्म्, ब्स्।ज् जैसे राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षायें उत्तीर्ण करने वाले मेधावी छात्रों को 23 वर्ष की आयु पूरी होने या स्नातक शिक्षा अथवा मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थान से डिप्लोमा प्राप्त करने में जो भी पहले हो तक इस योजना के तहत लाभ दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि संस्थागत श्रेणी के तहत शून्य से 18 वर्ष तक की आयु के ऐसे बच्चे, जिन्हें बालश्रम/बाल भिक्षावृत्ति/बाल वैश्यावृत्ति से मुक्त कराकर परिवार/ पारिवारिक वातावरण में समायोजित कराया गया हो या भिक्षावृति/वैश्यावृत्ति में शामिल परिवारों के बच्चे, शून्य से 18 वर्ष तक के ऐसे बच्चे, जिन्हें बाल गृहों/संप्रेक्षण गृहों से परिवार में पहुॅचाकर पुनर्वासित किया गया है या जो बाल देख-रेख संस्थाओं में रह रहे हैं और उन्हें वित्तीय सहायता देने से उन्हें परिवारिक देख-रेख/पश्चातवर्ती देख-रेख में पुनः समायोजित किया जा सकता है। पात्रता हेतु शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चों को छोड़कर अन्य सभी लाभार्थियों का किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में पंजीकरण होना जरूरी होगा। योजना का लाभ पाने के लिए बच्चे का आधार कार्ड, उनके माता या पिता की मृत्यु पर मार्च 2020 के बाद जारी मृत्यु प्रमाणपत्र, बच्चों का बैंक पासबुक और आय प्रमाणपत्र जरूरी है।






