अत्यंत रहस्यमयी है माती (माफ़ी ) गांव में स्थित प्राचीन मातेश्वरी गूंगादेवी का मन्दिर
हड़प्पा सभ्यता के समकालीन हो सकता है : माती (माफी) का इतिहास

अखिलेश शर्मा
बेहद रहस्यमयी है माती (माफी) गांव में स्थित प्राचीन माताेश्वरी गूंगा देवी मंदिर,
अखिलेश्वर महादेव मंदिर एवं प्राचीन सरोवर भूगनाताल हडप्पा सभ्यता का समकालीन हो सकता है: माती (माफ़ी) का इतिहास
इस क्षेत्र में अष्टभुजाकार कुआँ, लाल – पीले मृद भांड इत्यादि सहित विभिन्न वस्तुये प्राप्त हुई है बारिश के दिनों मे यहां कुछ बर्ष पहले हड्डियों का चूरा देखने को मिलता था इस क्षेत्र से संबंधित जनपद पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी के कई स्थानों पर ऐसे ही प्राचीन किलों के अवशेष प्राप्त हुए कुछ नष्ट हो गए कई स्थानों को शारदा नदी ने काटा लिया है लेकिन अभी भी आसपास के क्षेत्र में माती (माफी )जैसे ही प्रमाण मिलते हैं भुगनाताल के पास में स्थित प्राचीन अखिलेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत रहस्यमयी है जिस प्रकार माती(माफ़ी )में भूगनाताल स्थित है ठीक उसी प्रकार से ही शाहगढ किले के टीले के पास मे भी तालाब है, इस टीेले के कुछ दूरी पर ही गोमती नदी का उद्धगम स्थान भी है गोमती नदी के पास के कई स्थनों मे प्राचीन काल के कई ऐसे शिव मंदिर स्थित है जिनका अभी इतिहास रहस्य बना हुआ है स्थानीय लोकमान्यताओं के आधार पर यह त्रेता युग एवं महाभारत काल से संबंधित प्राचीन शिव मंदिर है इन प्राचीन शिव मंदिरों का अपना रहस्य मय इतिहास है क्योंकि वर्तमान मे इनमें बाबा इकोत्तरनाथ शिवालय मे अभी तक कोई ज्ञात नहीं कर सका कि सबसे पहले पूजा कौन करता है इसी प्रकार से छोटी काशी के नाम से मशहूर गोलागोकरण नाथ का मंदिर रामायण काल खंड का माना जाता है जिसे स्वयं दशानन रावण से सम्बन्धित माना जाता है ठीक इसी प्रकार से बिलसंडा के पास में स्थित लिलहर मे भी प्राचीन मंदिर एवं एक प्राचीन तालाब स्थित है जिसका रहस्य अपने आप में अलग है यह सभी कहीं ना कहीं माती (माफी) मंदिर से संबंधित हों सकते है माती (माफी) गांव में स्थित माता गूंगा देवी मंदिर,महादेव (माती) मे स्थित अखिलेश्वर महादेव मंदिर एवं भूगनाताल की पौराणिक कथाएं और ऐतिहासिक महत्व भी है महाभारत काल में यह क्षेत्र पांचाल राज्य के अंतर्गत आता था स्थानीय लोगों के आधार पर इस क्षेत्र के राजा चक्रवर्ती सम्राट राजा वेणु का शासन था यह बहुत ही धर्मात्मा प्रवृत्ति के शासक थे इसलिए कहना गलत नहीं होगा कि इसका ऐतिहासिक महत्व है जो भारतीय ज्ञान परम्परा के लिए समृद्ध स्रोत साबित हो सकता है इन स्थलों का अध्ययन हमें प्राचीन समाज की धार्मिक संस्कृति और वैज्ञानिक समझ को गहराई से जानने में मदद करेगा स्थानीय क्षेत्र वासियों के लिए यह एक अत्यंत पवित्र स्थान है जहां प्रति शुक्रवार को माता आदिशक्ति जगत जननी मातेश्वरी जगदंबा माँ गूंगा मैया का विशेष दरबार लगता है जिसमें दूर-दूर से लोग आकर अपने दु:खों को दूर करने के लिए माता के समक्ष प्रार्थना करते हैं और उनकी मनोकामना पूर्ण होती है स्थानीय लोक मान्यताओं के आधार पर एवं मंदिर के पुजारी सचिन गिरी से बात करने पर पता चला कि यह स्थान सात देवियों का जन्म स्थान है सातो देवियां अलग-अलग स्थान पर विराजमान हैं सबसे छोटी देवी माता गूंगा देवी अपने घर में ही माती (माफी) में स्थित है और अपने भक्तजनों की रक्षा करती हैं और उनके भंडारे भरती है






