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पार्क प्रशासन द्वारा जारी नये नियमों से जिप्सी चालक मुश्किल में

अब गाड़ी चालकों को फाउंडेशन के नाम‌ पर जमा करना होगा 29 और 11 हजार का शुल्क

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पार्क प्रशासन द्वारा जारी नये नियमों से जिप्सी चालक मुश्किल में

-अब गाड़ी चालकों को फाउंडेशन के नाम‌ पर जमा करना होगा 29 और 11 हजार का शुल्क


(निर्जेश मिश्र)
पलियाकलां-खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में संचालित गाड़ियों के‌ लिए पार्क प्रशासन ने अब कुछ नये‌ नियम जारी किए हैं, जिनका पालन कर पाना गाड़ी मालिकों के लिए बहुत ही मुश्किल है। वह नियम यह हैं कि जो गाड़ियां पार्क क्षेत्र में संचालित हो रही हैं, उन गाड़ी मालिकों से फाउंडेशन के नाम‌ पर 10 हजार रुपये जमा कराए जा रहे हैं, जिसमें 18 फीसदी जीएसटी लगाकर कुल 11800 रुपये होते हैं, जबकि इससे पहले यही शुल्क मात्र‌ पांच हजार जमा कराया जाता था, जो कि रिफंडेवल भी था। इसके‌ अलावा जो गाड़ी चालक बाहर होटलों से पर्यटकों को लाते और ले जाते हैं, उनसे 25 हजार और 18 फीसदी जीएसटी जोड़कर 29500 रुपये जमा कराए जा रहे हैं। इससे पहले यह शुल्क मात्र 15 हजार जमा होता था। मित्रों फाउंडेशन के नाम‌ पर जो शुल्क जमा‌ कराया जा रहा वह जिप्सी चालकों के‌ लिए बहुत ज्यादा है, क्योंकि हर व्यक्ति चार पैसे कमाने के लिए ही काम करता है। जब इतना ज्यादा शुल्क जमा कराया जाएगा तो गाड़ी मालिक खुद के लिए क्या बचा पाएगा। दुधवा भ्रमण करने का पूरा शुल्क 3880 रुपया निर्धारित किया गया है, जिसमें से 2030 रुपये पार्क प्रशासन को जाते हैं और 1850 गाड़ी मालिक को मिलते हैं, जिसमें तेल, ड्राइवर और गाड़ी का मेंटीनेंस भी शामिल है। इस हिसाब से गाड़ी मालिक कितना पैसा कमा पाएगा जरा सोचिए, क्योंकि उसे 1850 में से ही तेल डलवाना है, ड्राइवर को वेतन भी दे‌ना है और गाड़ी का मेंटीनेंस भी कराना है। कुछ जिप्सी मालिकों का कहना है कि भले ही शुल्क रिफंडेवल न हो, लेकिन पहले की तरह पांच हजार और 15 हजार ही जमा होना चाहिए। सबसे मजेदार‌ बात तो यह है कि जो शुल्क जमा कराया जाता है वह फाउंडेशन के नाम जमा होता है। फाउंडेशन यानि कि सहयोग राशि और सहयोग राशि में भला जीएसटी शुल्क किस बात का। कुल मिलाकर पार्क प्रशासन के इस तुगलकी फरमान से गाड़ी स्वामी काफी परेशान हैं। इससे तो यही स्पष्ट होता है कि पार्क प्रशासन गाड़ी मालिकों की‌ मजबूरी का फायदा उठा रहा है।


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