प्राकृतिक आपदाओं के निवारणार्थ श्रीपीठ पर दैवीय अनुष्ठान आरम्भ
प्राकृतिक आपदाओं के निवारणार्थ श्रीपीठ पर दैवीय अनुष्ठान आरम्भ

जय श्री जय श्री जय श्री*
*सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि*
॥
*आध्यात्मिक श्रीकुल सेवा संस्थान रजि० उ०प्र० पलिया कलां के तत्वाधान में श्रीपीठ श्रीकुल आश्रम मैं विश्वकल्याण हेतु विश्व में शांति बनी रहे कोई देविक आपदाएं ना आए कोई बीमारियां न फैले विश्व युद्ध ना हो ऐसी मंगल कामना करते हुए महराज श्री के निर्देशन में श्रीकल के आचार्य के द्वारा गुप्त नवरात्रि के अंतर्गत वेदी बनाकर प्रकृति स्वरूपा भगवती की आराधना की जा रही है भगवती को प्रसन्न करने के लिए सम्पूटीत दुर्गा सप्तशती का पाठ निरंतर कराया जा रहा है*
*क्योंकि श्रीकुल उपासक महाराज श्री ने वर्ष आरंभ में ही बताया था मंगल के शासन में सर्वत्र अमंगल होगा इसलिए भगवती की उपासना करना अत्यधिक आवश्यक है*
*देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य । प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वम् – त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य ॥*







