चन्द पैसों के लालच में आकर सच्ची पत्रकारिता का अपने ही लोग गला घोंटने के लिए हो जाते हैं तैयार
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाल उठाने पर भ्रष्टाचारियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार बन जाते हैं हिस्सा

आज के युग में आसान नहीं रही पत्रकारिता
– चन्द पैसों के लालच में आकर सच्ची पत्रकारिता का अपने ही लोग गला घोंटने के लिए हो जाते हैं तैयार
– भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाल उठाने पर भ्रष्टाचारियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार बन जाते हैं हिस्सा

(निर्जेश मिश्र)
लखीमपुर-खीरी। दोस्तों आज के युग में पत्रकारिता करना अब इतना आसान नहीं रहा। सच्ची पत्रकारिता का गला घोंटने में लोग जरा भी देरी नहीं करते हैं। यदि एक अच्छा और सच्चा पत्रकार समाज में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है तो फिर उसी के बीच में रहने वाले उसके कुछ साथी पत्रकार ही उस भ्रष्टाचार का एक हिस्सा बन जाते हैं और चन्द पैसों के लालच में आकर भ्रष्टाचारी द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को दबाने में उसका सहयोग करने लगते हैं। पत्रकार को लोकतन्त्र में समाज के चौथे स्तम्भ का नाम दिया गया है। जो समाज में हो रही बुराईयों का प्रतिकार करे, उसी को पत्रकार कहते हैं। यदि समाज में अच्छी और ईमानदार पत्रकारिता न हो तो पता नहीं समाज में कितने लोग अन्याय और भ्रष्टाचार में दबकर मर जाएं। किसी ने चन्द लाइनें लिखी हैं कि ‘‘अमन बेंच देंगे चमन बेंच देंगे, जमीं तो जमीं क्या गगन बेंच देंगे, कलम के सिपाही अगर न लिखें तो वतन के मसीहा वतन बेंच देंगे’’ शायद इसका अर्थ ऐसे लोग नहीं समझते हैं। पत्रकार का काम है कि समाज में यदि किसी प्रकार के गलत कार्य हो रहे हैं, तो उनके खिलाफ आवाज उठाकर उनका विरोध करना चाहिए, ताकि उन गलत और अवैध कार्यों को करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर अपराधों को खत्म किया जा सके। यदि कहीं सरकारी कार्यों में अनदेखी की जा रही है तो उनके प्रति आवाज उठाकर शासन तक पहुंचाना चाहिए, जिससे कि सरकारी कार्य सही और मजबूत तरीके से हो सकें। परन्तु कुछ लोग तो समाज में ऐसे पनप चुके हैं जो आवाज उठाने की जगह भ्रष्टाचारी से आर्थिक लाभ कमाने के लालच में उसका समर्थन देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे देते हैं। यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ आपने लिखना और आवाज उठाना बन्द नहीं किया तो भ्रष्टाचारी कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं। यहां तक कि आवाज उठाने वाले को इस दुनिया से विदा करने में भी ऐसे लोग जरा भी देरी नहीं करते है। शायद यही एक वजह है जो समाज से न तो भ्रष्टाचार समाप्त हो पा रहा और न ही भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हो पाती है। इतना ही नहीं यदि आप सम्बन्धित अधिकारियों को अवगत कराने का प्रयास करेंगे तो उनका न तो फोन रिसीव होगा और न ही उन्हें कार्यालय में आपसे मिलने का समय मिलेगा। यही सोचकर कभी-कभी मन व्यथित हो जाता है और समाज में हो रहे भ्रष्टाचारों की तरफ से नजरें मोड़नी पड़ जाती हैं। कुल मिलाकर चारों ओर भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार फैल चुका है। आप सच्चाई और ईमानदारी का राग अलापते रहिए, लिखते रहिए भ्रष्टाचार के खिलाफ। परन्तु कुछ भी नहीं होने वाला, जिसे देखो वह भ्रष्टाचार की ही जय-जयकार करता और माला जपता नजर आता है।






